मुख्यमंत्री योगी आदित्य ने श्री आदि शंकर विमान मण्डपम् के कुम्भाभिषेक के समापन सामारोह में हुये सम्मिलित
प्रयागाराज। मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश योगी आदित्यनाथ प्रयागराज के मेला क्षेत्र में आयोजित श्री आदि शंकर विमान मण्डपम् के कुम्भाभिषेक कार्यक्रम के समापन अवसर पर पहुंचे। मुख्यमंत्री सर्वप्रथम श्री आदि शंकर विमान मण्डपम् मन्दिर गये। उन्होंने मन्दिर के सभी तलों पर जाकर वहां पर स्थापित विग्रहों के दर्शन करते हुए विमान मण्डपम् के ऊपरी तल पर पहुंचे।
शंकर विमान मण्डपम में मुख्यमंत्री जी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से कांची कामकोटि पीठाधीश्वर शंकराचार्य से वार्ता भी की। जहां पर मेलाधिकारी विजय किरन आनन्द के द्वारा मुख्यमंत्री जी को कुम्भ मेला की जा रही तैयारियों की जानकारी देते हुए उन्हें मेला क्षेत्र के कार्यों को दिखाया गया।
मुख्यमंत्री जी श्री आदि शंकर विमान मण्डपम् मन्दिर होते हुए लेटे हुए हनुमान मन्दिर पहुंचे, जहां पर वे हनुमान जी के दर्शन के उपरान्त त्रिवेणी बांध के समीप स्थित श्री आदि शंकर विमान मण्डपम् के कुम्भाभिषेक कार्यक्रम में पहुंचे। कुम्भाभिषेक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें अंग वस्त्र भेंट किया तथा प्रयागराज में पवित्र नदियों के संगम को दर्शाने वाला चित्र भी भेंट किया गया। मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुम्भ से पहले इस तरह के आयोजन का किया जाना बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कुम्भाभिषेक के आयोजन करने वाले संतों एवं आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुम्भ के पहले कुम्भाभिषेक आयोजन होना एक शुभ लक्षण है।
कुम्भ भारत की सनातन पररम्परा तथा मानव कल्याण का एक सबसे बड़ा आध्यमिक एवं सांस्कृतिक परम्परा का आयोजन है। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन धर्म संस्कृति मनुष्य मात्र के लिए नहीं बल्कि इस चराचर जगत के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने की प्रेरणा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि किसी के कार्य पर उंगुली उठाना बहुत ही सरल होता है लेकिन कार्य में सहयोगी बनकर कार्य को मूर्तरूप में लाकर पूरा कराना यह महानता का लक्षण होता है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कुम्भ भारत की महान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। भारत की महान पीढी का उत्तरदायित्व बनता है कि हम सब कुम्भ के इस भव्य आयोजन को सम्पन्न करने के लिए उसी प्रकार की दिव्यता का परिचय दें। देश के अन्दर चार स्थानों पर यह पवित्र आयोजन सम्पन्न होता है जिसमें प्रयागराज का कुम्भ अपने आप में देश और दुनिया के लिए अलग ही कौतुहल एवं आकर्षण विषय बनता है। उन्होंने कहा कि पवित्र गंगा, यमुना और सरस्वती को मिलन स्थल इस त्रिवेणी पर आयोजित होना वाला कुम्भ अपने आप में अनेक प्रकार से प्रेरणा और उन दिव्य आध्यामिक शक्तियों को अर्जित करने का एक शुभ अवसर प्रदान करता है। इसलिए हम सबकी यह महती जिम्मेदारी बनती है कि सब मिलकर इस पूरे आयोजन को कुशलता पूर्वक भव्यता एवं दिव्यता के साथ सम्पन्न करने में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस वृहद आयोजन में सभी की भागीदारी आवश्यक है। हर व्यक्ति अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन करने लगे तो फिर कहीं भी कमी नही दिखेगी। दूसरों की कमियों को देखने के बजाय अगर व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानते हुए, दूसरे की अच्छाई से प्रेरणा लेने लग जाये तो यह धरती अपने आप में दिव्य लोक में बदलने मे बहुत देर नही लगेगी। उन्होंने कहा कि अबकी बार कुम्भ का आयोजन देश और दुनिया को संदेश देने वाला हो। जिसमें एकता का, स्वच्छता, राष्ट्र निर्माण में भूमिका का लोक कल्याण का मार्ग हो जिसके माध्यम से कुम्भ का यह संदेश अत्यन्त प्रेरणा दायक होगा। धार्मिक आयोजनों के पीठ, धर्माचार्यगण, संतगण सभी इस अभियान के साथ जुड़ें है। इन सभी की आध्यामिक साधना लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह एक दिव्य अनुभव है इस धरती का जहां पर कोटि-कोटि मानव अपनी श्रद्धा के साथ प्रयागराज की धरती पर आकर अपनी श्रद्धा को निवेदित करेगा। हमें अपने अतीत के साथ एक बार जुड़ जाने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि कुम्भ आयोजन के माध्यम से हजारो-हजारों वर्ष पुरानी अपनी इस परम्परा का एक बार साक्षात्कार करते हुए दिखायी देंगे। दिव्यता यहां के कण-कण में है इसको महसूस करने वाला व्यक्ति होना चाहिए और इसके लिए उस तरह की भावना का भी होना जरूरी है। इन्ही भावनाओं को लेकर कुम्भ आयोजन को सकुशल सम्पन्न करा सकते हैं। प्रयागराज का प्रत्येक नागरिक कुम्भ में आने वाला लोगों के स्वागत के लिए तैयार रहकर कुम्भ के आयोजन को सकुशल सम्पन्न कराने मे अपनी अपना सहयोग प्रदान करें।
शंकर विमान मण्डपम में मुख्यमंत्री जी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से कांची कामकोटि पीठाधीश्वर शंकराचार्य से वार्ता भी की। जहां पर मेलाधिकारी विजय किरन आनन्द के द्वारा मुख्यमंत्री जी को कुम्भ मेला की जा रही तैयारियों की जानकारी देते हुए उन्हें मेला क्षेत्र के कार्यों को दिखाया गया।
मुख्यमंत्री जी श्री आदि शंकर विमान मण्डपम् मन्दिर होते हुए लेटे हुए हनुमान मन्दिर पहुंचे, जहां पर वे हनुमान जी के दर्शन के उपरान्त त्रिवेणी बांध के समीप स्थित श्री आदि शंकर विमान मण्डपम् के कुम्भाभिषेक कार्यक्रम में पहुंचे। कुम्भाभिषेक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें अंग वस्त्र भेंट किया तथा प्रयागराज में पवित्र नदियों के संगम को दर्शाने वाला चित्र भी भेंट किया गया। मुख्यमंत्री जी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्रयागराज में आयोजित होने वाले कुम्भ से पहले इस तरह के आयोजन का किया जाना बहुत ही प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कुम्भाभिषेक के आयोजन करने वाले संतों एवं आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कुम्भ के पहले कुम्भाभिषेक आयोजन होना एक शुभ लक्षण है।
कुम्भ भारत की सनातन पररम्परा तथा मानव कल्याण का एक सबसे बड़ा आध्यमिक एवं सांस्कृतिक परम्परा का आयोजन है। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन धर्म संस्कृति मनुष्य मात्र के लिए नहीं बल्कि इस चराचर जगत के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने की प्रेरणा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि किसी के कार्य पर उंगुली उठाना बहुत ही सरल होता है लेकिन कार्य में सहयोगी बनकर कार्य को मूर्तरूप में लाकर पूरा कराना यह महानता का लक्षण होता है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कुम्भ भारत की महान परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। भारत की महान पीढी का उत्तरदायित्व बनता है कि हम सब कुम्भ के इस भव्य आयोजन को सम्पन्न करने के लिए उसी प्रकार की दिव्यता का परिचय दें। देश के अन्दर चार स्थानों पर यह पवित्र आयोजन सम्पन्न होता है जिसमें प्रयागराज का कुम्भ अपने आप में देश और दुनिया के लिए अलग ही कौतुहल एवं आकर्षण विषय बनता है। उन्होंने कहा कि पवित्र गंगा, यमुना और सरस्वती को मिलन स्थल इस त्रिवेणी पर आयोजित होना वाला कुम्भ अपने आप में अनेक प्रकार से प्रेरणा और उन दिव्य आध्यामिक शक्तियों को अर्जित करने का एक शुभ अवसर प्रदान करता है। इसलिए हम सबकी यह महती जिम्मेदारी बनती है कि सब मिलकर इस पूरे आयोजन को कुशलता पूर्वक भव्यता एवं दिव्यता के साथ सम्पन्न करने में अपना योगदान दें। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस वृहद आयोजन में सभी की भागीदारी आवश्यक है। हर व्यक्ति अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन करने लगे तो फिर कहीं भी कमी नही दिखेगी। दूसरों की कमियों को देखने के बजाय अगर व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानते हुए, दूसरे की अच्छाई से प्रेरणा लेने लग जाये तो यह धरती अपने आप में दिव्य लोक में बदलने मे बहुत देर नही लगेगी। उन्होंने कहा कि अबकी बार कुम्भ का आयोजन देश और दुनिया को संदेश देने वाला हो। जिसमें एकता का, स्वच्छता, राष्ट्र निर्माण में भूमिका का लोक कल्याण का मार्ग हो जिसके माध्यम से कुम्भ का यह संदेश अत्यन्त प्रेरणा दायक होगा। धार्मिक आयोजनों के पीठ, धर्माचार्यगण, संतगण सभी इस अभियान के साथ जुड़ें है। इन सभी की आध्यामिक साधना लोक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह एक दिव्य अनुभव है इस धरती का जहां पर कोटि-कोटि मानव अपनी श्रद्धा के साथ प्रयागराज की धरती पर आकर अपनी श्रद्धा को निवेदित करेगा। हमें अपने अतीत के साथ एक बार जुड़ जाने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि कुम्भ आयोजन के माध्यम से हजारो-हजारों वर्ष पुरानी अपनी इस परम्परा का एक बार साक्षात्कार करते हुए दिखायी देंगे। दिव्यता यहां के कण-कण में है इसको महसूस करने वाला व्यक्ति होना चाहिए और इसके लिए उस तरह की भावना का भी होना जरूरी है। इन्ही भावनाओं को लेकर कुम्भ आयोजन को सकुशल सम्पन्न करा सकते हैं। प्रयागराज का प्रत्येक नागरिक कुम्भ में आने वाला लोगों के स्वागत के लिए तैयार रहकर कुम्भ के आयोजन को सकुशल सम्पन्न कराने मे अपनी अपना सहयोग प्रदान करें।




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