Breaking News

पहली आजादी आंदोलन में सनातन धर्म का प्रभाव पर संग्रहालय में गोष्ठी, भारत भाग्यविधाताओं का हुआ सम्मान।

 प्रयागराज । प्रयागराज संग्रहालय में आयोजित 10 दिनी, प्रथम आजादी महोत्सव के सातवें दिन आज संग्रहालय में गोष्ठी का आयोजन सिविल इवैल्यूएशन फाउंडेशन के तत्वाधान में किया गया।


 आजादी के प्रथम आजादी "1857 जनक्रांति में सनातन का महत्व" विषयक  गोष्ठी में मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति राजाराम यादव ने कहा कि स्वतंत्रता के संग्राम में सबसे कीमती चीज रक्त को विद्रोहियों ने चढ़ाया उनका सर्वोच्च बलिदान हुआ यह सबसे महत्वपूर्ण है आज यहां पर यह जानकार आश्चर्य हुआ कि 18 सो 57 के विद्रोह में सनातन धर्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आयोजकों को बहुत बहुत आभार व्यक्त किया कि वह जनक्रांति को आम लोगों के बीच पहुंचा रहे हैं जिससे उन्हें प्रेरणा मिलेगी।

 ,विशिष्ट अतिथि डीआईजी के पी सिंह ने कहा कि 18 सो 57 का यह इतिहास जन-जन को बताना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ियां प्रेरित हो सकें उन्होंने विदेश की कई देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां के लोग जिस तरह त्याग की भावना से आजादी की जंग में कूदे जनसामान्य के लिए एक आदर्श है आज यहां आकर इतिहास के इस पक्ष को  सभी को जानना चाहिए। 
 संग्रहालय के निदेशक  सुनील गुप्ता  ने अध्यक्षता करते हुए कहां की आज का दिन बड़ा महत्वपूर्ण है जहां पर पहली आजादी का महोत्सव आज यहां मनाया जा रहा है वहीं पर 40000000 रुपए आजाद गैलरी के लिए स्वीकृत हुए हैं। इसमें ऐसे ही वीरेंद्र पाठक के द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारियों पर शहीदों के बारे में जानकारी व प्रयाग से लेकर आजतक की एक खास आधुनिक संग्रहालय बनेगा, जिसमें वेदों से लेकर अब तक की पूरी स्टोरी उपलब्ध होगी। 
सिविल डिफेंस के मुख्य डिफेंस अधिकारी ओंकार शर्मा जी ने बताया कि यह सनातन धर्म का ही प्रभाव है कि संकल्प के साथ लोग जुटे।
सिविल येवीलूशन फाउंडेशन के तत्वाधान में और इस कार्यक्रम में विषय प्रवर्तन करते हुए वीरेंद्र पाठक ने तथ्यों का उद्धरण देते हुए बताया कि सनातन धर्म ही प्रमुख कारण था जिसके जरिए हिंदू और मुस्लिम एक हो कर अंग्रेजों की सत्ता के साथ लड़े ।उन्होंने मौलवी लियाकत अली द्वारा जारी पैगाम जिस पर बिजरिश कद्र   की मोहर लगी है हवाला देते हुए कहा की लियाकत अली ने जो पैगाम जारी किया उसमें उन्होंने रीति रिवाज संस्कृति बचाने को जेहाद कहा ,इसी वजह से सभी हिंदू भी उनके पीछे हो लिए इसमें प्रयागवाल सबसे ज्यादा थे। ब्राम्हण यानी प्रयाग वाल सत्यसनातन का नारा देने से एक साथ हुए ।यह मौलवी लियाकत अली का दृष्टिकोण था वह कट्टर नहीं यही वजह है कि यह जन विद्रोह बन गया और भारतीयों ने 10 दिन तक प्रशासन चलाया।
इससे पहले  कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।  अतिथियों ने भारत भाग्य विधाता के सक्रिय कार्यकर्ताओं को पुष्पगुच्छ स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया जिन्होंने महर्षि भरद्वाज की प्रतिमा को लगाने में जागरूकता फैलाई , और जगह-जगह जाकर लोगों में नवचेतना जगा कर महर्षि भरद्वाज के बारे में आम जनमानस को जानकारी दिया।
 भारत भाग्य विधाता में सम्मानित होने वालों डॉ प्रमोद शुक्ला आचार्य पंकज शशीकांत मिश्रा अरविंद पांडे  उत्तम कुमार बनर्जी पूनम मिश्रा अभिनव उपाध्याय तापस घोष राजेश पांडे अजय शर्मा आदि थे संग्रहालय के इस गोष्ठी में गणमान्य लोगों के अलावा भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी दर्ज हुई।
सभा की समाप्ति राष्ट्र गान के साथ हुआ।
गोष्ठि का संचालन अरविंद पांडेय ने तथा अतिथियों का आभार डॉ प्रमोद शुक्ला ने वयक्त किया।

No comments