चंद्रयान-2 : चांद की सतह पर न उतर पाने की हो सकती हैं ये पांच अहम वजहें

खास बातें
इसरो के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुताबिक, चांद की सतह का मानचित्र बनाने और अन्य जानकारियां हासिल करने के लिए आर्बिटर उसके चक्कर काट रहा है। आर्बिटर पर बेहद आधुनिक उपकरण लगे हुए हैं, जो चप्पे-चप्पे को छान सकते हैं।
आर्बिटर को चांद का चक्कर काटकर दोबारा लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने वाली जगह पहुंचने में 3 दिन लगेंगे। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने आगे कहा, लैंडिंग साइट के करीब पहुंचने पर हम ऑर्बिटर में लगे सिंथेटिक अपर्चर राडार, आईआर स्पेक्ट्रोमीटर और हाई रेजोल्यूशन कैमरे की मदद से दस किलोमीटर की परिधि में पूरे इलाके को छानते हुए तस्वीरें लेनी होंगी।
इससे विक्रम का हाल मालूम चल सकता है। हालांकि वैज्ञानिक ने यह भी किया कि यदि विक्रम की लैंडिंग सही नहीं हुई होगी, तो उसके टुकड़े हो गए होंगे। ऐसे में सारी उम्मीद बेकार जाएगी। बता दें कि इसरो चीफ के सिवन ने भी अगले 14 दिन तक विक्रम से संपर्क साधने का प्रयास जारी रखने की बात कही है।
चांद की सतह पर न उतर पाने की ये हो सकती हैं अहम वजहें


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