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चंद्रयान-2 : चांद की सतह पर न उतर पाने की हो सकती हैं ये पांच अहम वजहें


Chandrayaan-2 Lander Vikram will know the exact condition three days later

खास बातें

  • तीन दिन बाद पता चलेगा लैंडर विक्रम का सही हाल
  • आर्बिटर दोबारा उसी जगह पर पहुंचेगा, जहां विक्रम के साथ संपर्क टूटा था
  • आर्बिटर दोबारा संपर्क टूटने वाली जगह पहुंचकर लेगा हाई रेजोल्यूशन की तस्वीरें
भले ही चांद पर अपना लैंडर उतारने के सपने को लैंडर विक्रम के साथ मात्र 2.1 किलोमीटर पहले संपर्क टूटने से ग्रहण लगता महसूस हो रहा हो, लेकिन इसरो की मानी जाए तो कहानी अभी तक खत्म नहीं हुई है। अब भी लैंडर विक्रम का हाल जानने की एक उम्मीद बाकी है।
इसरो का कहना है कि तीन दिन बाद आर्बिटर दोबारा उसी जगह पर पहुंचेगा, जहां विक्रम के साथ संपर्क टूटा था। उस समय आर्बिटर पर लगे अत्याधुनिक कैमरों से उस इलाके की हाई रेजोल्यूशन वाली तस्वीरें लेकर विक्रम का हाल मालूम करने की कोशिश की जाएगी।

इसरो के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुताबिक, चांद की सतह का मानचित्र बनाने और अन्य जानकारियां हासिल करने के लिए आर्बिटर उसके चक्कर काट रहा है। आर्बिटर पर बेहद आधुनिक उपकरण लगे हुए हैं, जो चप्पे-चप्पे को छान सकते हैं।

आर्बिटर को चांद का चक्कर काटकर दोबारा लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने वाली जगह पहुंचने में 3 दिन लगेंगे। वरिष्ठ वैज्ञानिक ने आगे कहा, लैंडिंग साइट के करीब पहुंचने पर हम ऑर्बिटर में लगे सिंथेटिक अपर्चर राडार, आईआर स्पेक्ट्रोमीटर और हाई रेजोल्यूशन कैमरे की मदद से दस किलोमीटर की परिधि में पूरे इलाके को छानते हुए तस्वीरें लेनी होंगी।

इससे विक्रम का हाल मालूम चल सकता है। हालांकि वैज्ञानिक ने यह भी किया कि यदि विक्रम की लैंडिंग सही नहीं हुई होगी, तो उसके टुकड़े हो गए होंगे। ऐसे में सारी उम्मीद बेकार जाएगी। बता दें कि इसरो चीफ के सिवन ने भी अगले 14 दिन तक विक्रम से संपर्क साधने का प्रयास जारी रखने की बात कही है।

चांद की सतह पर न उतर पाने की ये हो सकती हैं अहम वजहें

  • चांद के दक्षिणी ध्रुव की पथरीली जमीन, जिससे टकराकर क्षतिग्रस्त हो गया हो
  • तेज सौर हवाएं, जिसके चलते विक्रम मार्ग से भटककर किसी चट्टान से टकराया हो
  • मुख्य इंजन में गड़बड़ी आ गई हो, जिससे उतरने के लिए जरूरी ऊर्जा न मिली हो
  • विक्रम का अपने रफ्तार पर काबू पाने वाले उपकरणों पर नियंत्रण खो गया हो
  • ज्यादा तेज गति से लैंडिंग के चक्कर में धूल का बवंडर, जिससे विक्रम का इंजन खराब हो गया हो

आखिर कैसे पता लगाने की हो रही कोशिश
चांद की कक्षा में घूम रहे ऑर्बिटर की मदद से विक्रम की तस्वीर और उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। वैज्ञानिक विक्रम के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर के आंकड़ों से ये पता करने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर 2.1 किमी की ऊंचाई पर क्यों वह अपने रास्ते से भटक गया। फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर किसी विमान के ब्लैक बॉक्स जैसा ही यंत्र होता है।

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