मुसलमानो ने ईद की खरीदारी से बनाई दूरी, ईद पर महामारी से निजात की दुआ की तैयारी..
पूरे देश में मार्केट के खुलने की खबर आ रही है, लेकिन उससे अच्छी ख़बर ये है कि ईद की खरीदारी के लिए कोई भी नहीं निकला। जो एक बेहतरीन ख़बर है।
दुख की इस घड़ी में जब की पूरी दुनिया अपनों को खोने का ग़म मना रही है, खुशियां कैसे मनाई जा सकती है।
भारतवर्ष के ही नहीं अपितु पूरी दुनिया के मुसलमान अल्लाह से रो-रो कर इस महामारी से निजात की दुआ मांग रहे हैं।
दिल्ली सरकार ने मरकज के नाम पर मुसलमानों को बदनाम किया, और अलग-अलग नाम देने का काम मीडिया ने किया, परन्तु सारे दावे धीरे धीरे झूठे साबित हो गए, अब इन लोगों की मंशा थी कि मुसलमानों को फिर से शॉपिंग के लिए घर से बाहर लाया जाए और बदनाम किया जाए। आप सभी से निवेदन करना चाहता हूं सभी को एक ही चीज़ का ध्यान रखना होगा कि कोई भी ऐसा काम नहीं करें जिससे इस देश की मीडिया, फिर से सारा का सारा मामला मुस्लिम समाज पर थोप दिया जाए और मुसलमान और हिन्दू भाई के नाम पर राजनीति करने लगे, हमें आपको सावधानी बरतें हुए घर में रहना कोई ईद की नमाज के नाम पर घर बाहर जमा नहीं होना है और कोई ईद की तैयारी के लिए बाहर निकालना है।
जब नमाज़ अदा नहीं हुई मस्जिदों में, जब तरावीह नहीं पढ़ी जमात में, जुमा की नमाज़ अदा नहीं हो सकी तो फिर ईद की नमाज कैसी ?
दुनिया के लगभग सभी मुल्कों के धर्म गुरू ने घर पर ही नमाज शुकराना अदा करने का आग्रह किया है।
ये वक्त अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी का वक्त है।
अपने ईद की तैयारी का सारे पैसे गरीबों की मदद में इस्तेमाल कीजिए, यही सच्ची ईद और इबादत होगी।
ये ईद उन सभी गरीब लोगों के नाम जिनके पास पैसा नहीं है जो मजलूम है, जो भुखें है। इसमें भी हिन्दू भाईयों को शामिल करना है जो ज़रूरतमंद है।
*लारैब अहमद नियाज़ी* ✍️
*छात्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया*


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