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एक्टर नही क्रिकेटर बनना चाहते थे, इरफान खान

अभिनेता इरफान खान का जन्म राजस्थान के टोंक जिले में पठान परिवार में हुआ था, इरफान के पिता का टायर का बिजनेस था इसलिए इरफान भी परिवार के साथ टोंक से जयपुर स्थानांतरित हो गए। बचपन से ही  हुनरबाज़ इरफान की शुरुआती दिलचस्पी अदाकारी में ना होकर क्रिकेट में थी और इरफान एक धाकड़ क्रिकेटर के रूप में क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉड्स मैदान में खेलने का सपना लिए समय के साथ अपने गेंद और बैट के खेल की कला निखार  रहे थे, उनका चयन सीके नायडू ट्रॉफी के लिए भी हुआ लेकिन घरवालों की रजामंदगी ना होने के कारण लॉड्स मैदान में खेलने का सपना शुरू में ही पल्लवित होने से पहले खत्म हो गया।
छुपकर नाटक देखने और रात में जागकर उन दिनों रेडियो पर कहानियां सुनने के सिलसिले ने इरफान खान को उनकी नई दुनिया रंगमंच और बड़े पर्दे से रूबरू करवाया , नसीरुद्दीन शाह के अभिनय और अदाकारी से प्रभावित इरफान में अपने आप को स्थापित करने के लिए जयपुर के रविंद्र रंगमंच केंद्र से नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा दिल्ली तक का सफर किया। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अदाकारी और कला की बारीकियां सीखने के बाद इरफान ने मुंबई का रूख़ किया और सीरियल से अपने कैरियर की शुरुआत किये , तिगमांशु धुलिया द्वारा लिखित फिल्म हासिल ने इरफान के जीवन में नए पड़ाव स्थापित किए पूर्व के ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति ,प्रेम व्यवहार और इलाहाबादी अंदाज में बनी इस फिल्म में इरफान खान का जीवंत किरदार फिल्म के अंडररेटेड होने के बावजूद हमेशा दर्शकों के जेहन में याद रहेगा । वरियर, द किलर,  मदारी ,हिंदी मीडियम जैसी अनेक फिल्मों में अपने होनर और अदाकारी का लोहा मनवाने के बाद इरफान खान सफलता की चरम पर पहुंचते हुए हॉलीवुड में जुरासिक पार्क जैसी फिल्में करके अपने काम का लोहा मनवाया , मानवीय करुणा के  ध्वजा वाहक इरफान हमेशा से ही धार्मिक कट्टरता का विरोध समय-समय पर दर्ज कराते आए थे, पठान परिवार में जन्म होने के बावजूद पूर्णतया शाकाहारी और पशु प्रेमी इरफान ने 2018 में डायग्नोसिस न्यूरो एंडोक्राइन ट्यूमर से जुड़ी जानकारी का ट्वीट करके लाखों चाहने वालों को उदास और गमगीन कर दिया था और अपनी आखिरी फिल्म अंग्रेजी मीडियम के प्रमोशन के  भावनात्मक संदेश, अदाकारी, जिंदादिली और धर्मनिरपेक्षता की वजह से इरफान खान अपने दर्शकों के दिल और जहन में हमेशा रहेंगे।।

                            लेखक और विचारक
                                आयुष मिश्रा

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