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कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं का अंत कब


एक तरफ जहां आज विश्व के समस्त देश कोरोनावायरस की महामारी से हताश और निराश है वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का कश्मीरी अलाप और तेज हो गया है बीते दिनों आर्मी के कर्नल सहित 5 लोगों की शहादत और फिर सीआरपीएफ के 92 बटालियन पर कायराना हमला करवा कर पाकिस्तान की आर्मी और आई एस आई ने मौका परस्ती का एक और सबूत दिया है, अमन चैन और मानवता का दुश्मन मुल्क पाकिस्तान आए दिन कभी सीजफायर उल्लंघन करके और कभी आतंकवादी हमलों से अपने ताबूत में कील मारकर के अपना भविष्य दुरुस्त कर रहा है। भारत के लिए कश्मीरी घाटी में शांति अमन चैन और कश्मीरी युवाओं को भारत के मुख्यधारा से जोड़ना एक कठिन चुनौती हो गई है जिस पर अभी तक भारत ने कारगर सफलता हासिल की है लेकिन समस्या के पूर्णतया समाधान के लिए सीमा पार से हो रही आतंकवादियों की सप्लाई और पाक अधिकृत कश्मीर से दागे जा रहे हथगोलों और मोर्टार को रोकने के लिए पाकिस्तान पर स्थाई कार्यवाही और पुख्ता इलाज की जरूरत है। हजारों भारतीय सैनिकों के शहादत से लाल हुई कश्मीरी घाटी में अमन चैन स्थापित करने के लिए भारतीय सेना सहित अर्धसैनिक बल बीते कई दशकों से कार्यरत हैं लेकिन बात है पूर्णतया समस्या से निजात की है ऐसे में यह जरूरी हो जाता है देखना की पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव सहित वह कौन-कौन से पहलू हैं जो पाक अधिकृत कश्मीर को आजाद कराने में और आतंकवादी घटनाओं के खात्मे के लिए उपयोगी साबित होंगे, आज देश और शहीद के परिवार जन इसी उम्मीद में है कि कश्मीर में आतंकवादियों की घटना को खत्म करके भारत का नेतृत्व शहीद के शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करेगा।

आयुष मिश्रा 
लेखक और विचारक

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