भारत- चीन लद्दाख सीमा विवाद पर विस्तृत नजर....आयुष मिश्रा
बीते 1 माह से जारी लद्दाख में भारत चीन गतिरोध अब आखिरी चरण में आ पहुंचा है ।
चीनी सरकार के भूमि विस्तार की नीति से चीनी सीमा से लगे आज सभी देश प्रभावित और निराश हैं, ऐसा ही वाक्य अप्रैल में चीनी सेना द्वारा लद्दाख में देखने को मिला जिसे सुलझाने के लिए 6 जून से ही लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारियों की बातचीत जारी है और जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए उत्तरी सैन्य कमांडर लेफ्टिनेंट वाई के जोशी ने समीक्षा की, गतिरोध के शुरुआत के दिनों में भारतीय और चीनी सैनिक के बीच तनातनी की स्थिति बनी हुई थी और हिंसक झड़पों की भी खबर आयी थी। पूर्वी लद्दाख में पेयोंग झील समेत कई स्थानों पर टकराव की नौबत आ गई क्योंकि दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटने को तैयार नहीं थी, भारत द्वारा पूर्वी लद्दाख पांगोंग त्यो झील इलाके में लगभग महीने भर पहले एक सड़क बनाने पर चीन द्वारा हस्तक्षेप और विरोध शुरू हुआ था जो बाद में गतिरोध में बदल गया।
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| आयुष मिश्रा( लेखक - विचारक) |
इसी विवाद में भारत अपने कूटनीति का लोहा मनवाते हुए अमेरिका जैसे प्रमुख देश को मुद्दे से दूर रहने की हिदायत देकर एक बार फिर भारत के प्रभावी नेतृत्व का एक और सबूत विश्व पटल पर रखा है। अभी की ताजा जानकारी यह है कि चीनी सेना और नेतृत्व भारत की संप्रभुता का सम्मान करते हुए अपने पहले की स्थिति से पीछे हटी हैंलेकिन चीन के इतिहास और रवैया को ध्यान में रखते हुए इस गतिरोध पर आगे और भी सैन्य मीटिंग और स्थाई समाधान की जरूरत है जो आने वाले दिनों में चलती रहेगी।भारत सरकार के रुख की माने तो सीमा विवाद का हल शांतिपूर्ण ढंग से होगा ऐसा माना जा रहा है ।



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