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बिहार की आधी आबादी बेरोजगार, रोजगार के अवसर पैदा करने से परहेज़ करती सरकार

बिहार की आधी आबादी (46.6%) बेरोजगार हो चुकी है।ये आंकड़ा इस बात का सबूत है कि पिछले 15 सालों में एक भी कल कारखाने और दूसरे रोज़गार के साधन पैदा नहीं किए गए और इसका खामियाजा भुगतना हम जैसे युवाओं को पड़ रहा है। - लारैब अहमद नियाज़ी

युवाओं को, धर्म के नाम पर, जाति के नाम पर सिर्फ और सिर्फ बाटने की बात की गई और बिहार के युवाओं को पढ़ाई से दूर रखा गया, नतीजा यह हुआ कि प्राथमिक विद्यालयों से ले करके यूनिवर्सिटी स्तर तक सिर्फ और सिर्फ अंधकार दिखता है।
रोज़गार की तलाश में युवाओं को पलायन करना पड़ता है लोग अपने घरों से, अपने लोगों को छोड़ कर के सैकड़ों, हजारों किलोमीटर दूर जाने को असर्मथ है क्योंकि उनके सामने सबसे बड़ा काम होता है अपना और अपने परिवार के लोगों का पेट भरना। बिहार और झारखंड और उत्तरप्रदेश के लोगों को जितनी परेशानियों का सामना दूसरे राज्यों में  करना पड़ता हैं उसका अंदाज़ा शब्दों में लगाना बेहद मुश्किल है। सालों तक एक दूसरे के साथ  रहने के बावजूद कोई अपना नहीं होता है। वो अपनापन जो अपने गांव मोहल्ले में होता है वो ज़िन्दगी बिल्कुल ख़त्म हो जाती है।
रोज़गार का साधन पैदा नहीं करने की वजह से बिहार विकास के क्षेत्र में लगातार पिछड़ रहा है। गरीबी, भुखमरी के कारण क्राइम का स्तर भी बढ़ रहा है।
शिक्षा मिलती तो एक बेहतर इंसान बनने का मौका मिलता। इसका सबसे बड़ा कारण बिहार में शिक्षा की गुणवत्ता, व्यवस्था और देखभाल की कमी का होना है। दूसरे प्रांतों- प्रदेशों के शिक्षा की गुणवत्ता के मुकाबले में बिहार के छात्रों को स्तर बेहद कम हो जाता है। बिहार में किसी भी विश्विद्यालय में समय पर सेशन तक पूरा नहीं हो पा रहा है इससे ज़्यादा शर्मनाक चेहरा और क्या हो सकता है। स्कुलों में शिक्षकों की कमी, कॉलेज में प्रोफ़ेसर की कमी इसका एक कारण है।
आज स्थिति इतनी दयनीय हो गई है कि पढ़े लिखे युवाओं को मनरेगा में मज़दूरी करनी पड़ रही है।
बिहार सरकार ने कभी कोई कदम उठाने की कोशिश तक नहीं की, सोचा तक नहीं की हमें रोज़गार के लिए अवसर पैदा करना चाहिए या करना होगा। कोई भी अपने घर परिवार को छोड़ कर दूसरे राज्यों में जाना नहीं चाहता है, घर से बाहर रहना किसी को पसंद नहीं है। सबको अच्छी शिक्षा अपने घर के पास मिलनी चाहिए, सबको नौकरी अपने घरों के पास मिलती चाहिए।

बिहार में योग्यता और क्षमता की कोई कमी नहीं है बस सरकार के नियत की कमी के कारण बिहार की युवा पीढ़ी बर्बादी के कगार पर पहुंच गई है। हर मुद्दे पर सिर्फ और सिर्फ भाषण से कोई फायदा नहीं होने वाला है। देश और राज्यों के सरकारों में बैठे लोगों को अपने परिवार के बच्चों की चिंता होती खूब दिखती है, दिन और रात अपने परिवार के बच्चों का भविष्य ठीक करने में लगे रहते हैं ये कोई खराब बात नहीं है लेकिन अगर आप सत्ता में है तो जितनी चिंता आपको अपने परिवार के बच्चों के लिए होती है उतनी ही चिंता आपको अपने राज्यों और देश के युवाओं के लिए करनी चाहिए।
सरकार मांगने और लेने की राजनीति को ख़तम करके युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए  ठोस कदम उठाने की कोशिश करनी चाहिए। इस देश में युवाओं को मजबूत करने की कोशिश करे।

हिंदुस्तान सबसे आगे तभी बढ़ सकेगा जब देश के युवाओं को मजबूत करेंगें क्योंकि देश के युवा पीढ़ी ही देश का भविष्य है, मैं निराश  हूं लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी है।
मुझे मेरे बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोज़गार चाहिए। बिहार को बेहतर बनाने की कवायद शुरू करनी चाहिए।

*लारैब अहमद नियाज़ी*
छात्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली

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