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ड्रैगन के क्यों हैं जहरीले मंसूबे - आयुष मिश्रा (लेखक)

पहले ही कोरोना से विश्व में अशांति और भयवाह वातावरण बनाने वाला चीन इन दिनों इंसानियत के निकृष्टतम स्तर से गुजर रहा है , अकारण शुरू हुआ चीन भारत सीमा विवाद आज तथाकथित शांति के गलियारों से होते हुए मारपीट, हाथापाई करते हुए आज भारतीय सैनिकों की जान लेने पर उतर आया है । 

पहले ही कोरोना संक्रमण और विश्व में हो रही फटाफट मौतों ने एक स्वस्थ व्यक्ति के मस्तिष्क में ताला बंद कर दिया है ऐसे में चीन की नीच हरकत आज भारतीयों के मानसिक असंतुलन का बहुत बड़ा कारण है । गल्वान घाटी से आई कमांडिंग ऑफिसर सहित 20 सैनिकों के शहादत की खबर ने सभी को झकझोर कर रख दिया । चीन के जहरीले , धोखेबाजी, क्रूरता का इतिहास काफी पुराना और गहरा है जिसका द्वंश भारत समेत दूसरे पड़ोसी देश भी समय-समय पर झेलते आयें हैं । आज मेरी इन पंक्तियों  पर गौर करने का दिन है कि "आप अपने में चाहे जितने अच्छे हो लेकिन आप का विस्तार अमन-चैन और विकास इस पर निर्भर करता है कि आपका पड़ोसी कैसा है " और कहीं अगर पड़ोसी चीन जैसा मिल गया तो नफरत, द्वेष , अधिकारों के हनन की बू बार-बार आते रहना लाजमी है । ऐसे में जरूरी यही है कि 2 फुटी मंगोलियन रेस के दानव के ड्रैगन का विष  निकालकर उसे हमेशा के लिए निस्तेनाबूत कर दिया जाए, जिससे आने वाले समय में तो कम से कम जहर से छुटकारा मिले । 
चीन अच्छे से जानता है एक बार कोरोना पर विजय प्राप्त होने से विश्व के सभी देश उससे अपना अपना हिसाब किताब पूरा करेंगे  और एशिया महाद्वीप में सवाल जवाब का सारा दारोमदार भारत पर रहेगा इसीलिए पहले से ही भारत में अस्थिरता पैदा करो और एलएसी, गल्वान घाटी जैसी कायरता करके भारत को डराओ लेकिन क्या चीन इतना अनभिज्ञ है कि उसे अपने ही ताबूत पर पड़ रहे कील की आवाज ना सुनाई दे रही है ना दिखाई दे रही है ? कोई बात नहीं चीन ताबूत मजबूत बनवा कर तैयार करे हम भारतीय भी तिलांजलि देने के लिए तैयार है ।

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