Breaking News

"जयंती विशेष" राष्ट्रवादी उपासक श्यामा प्रसाद मुखर्जी

6 जुलाई 1901 को कोलकाता में जन्मे मां भारती के मानस पुत्र श्यामा प्रसाद मुखर्जी को देश की एकता और अखंडता के साथ ही सामाजिक न्याय के लिए याद किया जाता है । 
वीर सावरकर जैसे अग्रिम पंक्ति के राष्ट्रवादी उपासक रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने वीर सावरकर के राष्ट्रवाद से प्रभावित होकर हिंदू महासभा में शामिल हुए , श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक रहे और 1952 में पहला जन संघ अधिवेशन कानपुर के फूल बाग सफलतापूर्वक आयोजित करवाए। चूंकि बंगाल से थे तो श्री मुखर्जी और रविंद्र नाथ टैगोर की जुगलबंदी आज भी साहित्य प्रेमियों के जहन में है । श्याम प्रसाद मुखर्जी कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति का क्रियान्वयन भी सफलतापूर्वक किया था । श्यामा प्रसाद मुखर्जी देश के धर्मगत बंटवारे के प्रखर विरोधी थे उनका मानना था धर्म के आधार पर देश का बंटवारा सामाजिक समस्या के लिए नासूर बनेगा । देश की एकता और अखंडता के लिए प्रखर वक्ता और नेतृत्वकर्ता जम्मू  कश्मीर को धारा 370 के तहत दिया गया विशेष दर्जा के विरोध में उन्होंने अपनी आवाज बुलंद की जो बाद में उनके रहस्यमई मृत्यु का कारण भी बना।
नेहरू सरकार में उद्योग मंत्री रहते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने छोटे और लघु उद्योग को आजादी के तुरंत बाद भारतीय अर्थव्यवस्था की नीव बताया था । सन 1953 में बिना परमिट के जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के लिए आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने कश्मीर गये जहां उन्हें नजरबंद कर दिया गया और 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को मृत पाया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक लोकप्रिय नेता थे जिनको देखने और सुनने की भीड़ लाखों में होती थी उनके राष्ट्रवादी भाषणों का संकलन इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित अन्य शिक्षा संस्थानों में सहेज कर रखा गया है। 
                  आयुष मिश्रा [ लेखक- विचारक]

No comments