Breaking News

क्या है कोरोना से संबंधित दवाई कोरोनिल का मामला- आयुष मिश्रा


आयुर्वेद, इलाज की वह प्राचीन पद्धति जो पूर्णतया प्राकृतिक, न्यूनतम दुष्परिणाम और बहुत ही कम पैसों की व्यवस्था है, जो आज कोरोनिल नामक दवा के कारण काफी चर्चा में है। 
बात यह है कि कुछ दिन पहले योग गुरु बाबा रामदेव ने पतंजलि और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस जयपुर द्वारा बनाए गए कोरोनिल नामक दवा की लॉन्चिंग की, जिसमें यह दावा किया बाबा रामदेव ने कि इस दवा से कोरोना संक्रमित व्यक्तियों को स्वास्थ्य लाभ होता है । इसके बाद तो बड़े-बड़े दवा कंपनियों के दफ्तरों में उठापटक शुरू हो गई, रास्ते खोजे जाने लगे कि पतंजलि और बाबा रामदेव के इस प्रयास को कैसे विफल किया जाए , लोगों में इसके खिलाफ कैसे दुष्प्रचार किया जाए ।
बड़े-बड़े दवाई निर्माता कंपनियों का पेड़ दर्द होना लाजमी है, अगर लोगों को 500- 600 में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवा मिल रही है तो कोई 3500-4000  हजार की दवाइयां क्यों खरीदेगा, देसी विदेशी अंग्रेजी दवाई निर्माता कंपनियों के ठगारों को कौन पूछेगा । मीडिया और कंपनियों द्वारा आवाज उठने लगी कि यह दवा कोरोनावायरस को नहीं खत्म करती है , तो जो वर्तमान में हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन , रेमदेसीविर, फेवीपिरावीर आदि दवा जो कोरोनावायरस के इलाज में प्रयोग हो रही है वह कौन सी कोरोनावायरस मारने वाली दवा है  ।
वर्तमान में कोरोनावायरस का कोई इलाज नहीं है लेकिन शुरुआती संक्रमण को कम करके खत्म किया जा सकता है ।
कोरनिल का लाइसेंस भी इसीलिए अप्रूव हुआ था तो निर्णय हमको आपको लेना है कि बड़े दवा कंपनियों के जालसाजी में फस के पैसे बर्बाद करने हैं या देसी प्राकृतिक बिना दुष्परिणाम वाले कोरोनिल दवा का उपयोग करना है । 
                आयुष मिश्रा लेखक, विचारक

हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का दुष्परिणाम तो जानलेवा है , गर्भवती महिलाओं के लिए ये दवा पूर्णतया निषेध है , इसके बावजूद बहुत बड़ी संख्या में विश्व के विभिन्न देशों ने हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन का बड़े पैमाने पर भारत सहित अन्य देशों से निर्यात किया था । समय की जरूरत यह है कि इस संकट में ज्यादा से ज्यादा प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जाए जिससे कोरोनावायरस का व्यक्ति के शरीर पर संक्रमण का असर कम हो ,मृत्यु दर में कमी आए , इलाज  में पैसे का वजन इतना ना बढ़े की जान अस्पताल का बिल भरने से ही निकल जाए , ऐसे में कोरोनिल और स्वासिर दोनों ही भारत जैसे तमाम देश के लिए अंग्रेजी दवाइयों से बेहतर विकल्प हो सकते हैं, खैर अंतिम निर्णय सरकार के हाथों में सुरक्षित है ।

No comments