यूपी पंचायत चुनाव : प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद क्या ऐसे चलेगी गांव की सरकार? सीएम योगी से उठी यह मांग
प्रदेश के ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासनिक समितियां गठित किए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। हाल ही में ग्राम प्रधानों के संगठन राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन की ओर से इस बारे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है।
प्रधानों का कार्यकाल आगामी 25 दिसम्बर को खत्म हो रहा है। मौजूदा ग्राम पंचायतों का गठन 26 दिसम्बर 2015 को हुआ था। वर्ष 2015 के चुनाव में थोड़ा विलम्ब होने पर सहायक विकास अधिकारी पंचायत ही प्रशासक बनाए गए थे। उस वर्ष पंचायतों का कार्यकाल सात नवम्बर को खत्म हो गया था, पंचायतों के चुनाव चल रहे थे, इसलिए 8 नवम्बर से 25 दिसमबर के बीच सहायक विकास अधिकारी पंचायत को ही प्रशासक बनाया गया था।
संगठन के प्रवक्ता ललित शर्मा ने पत्र में मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के बाद नई ग्राम पंचायतों का गठन होने तक कार्यवाहक व्यवस्थ बनाए रखने के लिए मौजूदा ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में प्रशासनिक समितियां गठित की जाएं। उन्होंने तर्क दिया है कि कोविड-19 महामारी, पीएफएमएस प्रणाली जैसे नियोजित व अपरिहार्य कारणों के चलते वर्तमान ग्राम पंचायतें लगभग एक साल से अधिक समय से अधिक अंतराल तक विकास व नियोजन प्रक्रिया से वंचित रही हैं। इन हालात में ग्राम पंचायतों में सरकारी कार्मिक को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाना विधि व्यवस्था, निरंतर विकास और व्यापक जनहित में उचित नहीं है।
चालू वित्तीय वर्ष और पिछला करीब 2500 करोड़ रुपया ग्राम पंचायतों के खातों में पड़ा हुआ है। करीब 4000 करोड़ रुपया पन्द्रहवें वित्त आयोग का धन और मिलना है। श्री शर्मा ने आशंका जतायी है कि अगर प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकारी कार्मिक प्रशासक बनाये गये तो यह धनराशि या तो विकास कार्यों में खर्च नहीं किया जाएगा और अगर खर्च हुआ तो सरकारी धन का दुरुपयोग होगा।


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