शहादते बिन्ते रसूल पर मुस्लिम इलाका ग़मगीन
अय्यामे फात्मी पर ग़मगीन माहौल मे निकला शबीहे ताबूत और अलम,फुल माला चढा़ कर किया अक़िदत का इज़हार, जगहां जगहां पर हुई मजलिसे।
रसूले अकरम मुहम्मदे मुसतफ़ा(स०अ०व०)की बेटी पहले इमाम हज़रत अली की शरीके हयात हज़रत हसन और हज़रत हुसैन की माँ सय्यदा ताहिरा ,फात्मतुत ज़हरा की यौमे शहादत पर तीन दिवसीय अय्यामे फात्मी पर जहाँ जगहां जगहां मजलिसें आयोजित की गईं वहीं दरियाबाद स्थित इमामबाड़ा ग़ुलाम अब्बास से शायर नजीब इलाहाबादी के संचालन मे एक जुलूस भी निकला।जिसको मौलाना सै०कलबे अब्बास साहब ने खिताब करते हुए जनाबे फात्मा ज़हरा की शहादत का ज़िक्र किया।कहा ज़ालिमों ने फात्मा ज़हरा पर जलता हुआ दरवाजा गिरा कर उन्हें दरो दिवार के बीच पीस कर शहीद कर दिया।कहा ज़ालिमो के हमले मे फात्मा की शिकम (कोख) मे पल रहे जनाबे मोहसिन भी शहीद हो गए।
मजलिस के बाद अनजुमन ग़ुनचा -ए-क़ासिमया के नौहा ख्वान शादाब ज़मन,असकरी अब्बास, शबीह अब्बास, ज़हीर अब्बास,कामरान रिज़वी, अली रज़ा रिज़वी, शबीह रिज़वी आदी ने शायर तालिब इलाहाबादी का लिखा ग़मज़दा नौहा
अस सलामो अलैके या सय्यदा, अस सलामो अलैके या फात्मा,अस सलामो अलैके या मरज़िया,अस सलामो अलैके या ताहिरा के फलक शिगाफ नारों के साथ अनजुमन के सदस्यों ने मातम करते हुए जुलूस को देर रात दरियाबाद स्थित दरगाह हज़रत अब्बास पर पहुंच कर संपन्न कराया।जुलूस मे अनजुमन हाशिमया, अनजुमन मुहाफिज़े अज़ा दरियाबाद ने भी नौहा और मातम का नज़राना पेश करते हुए जुलूस में शिरकत की।अलम ताबूत पर लोगों ने अक़िदत के फूल चढ़ा कर मन्नतें व मुरादें मांगी।जुलूस मे गु़लाम अब्बास, जावेद अब्बास की ओर से अनजूमनो को जानमाज़ भेंट की गई।जुलूस मे सैय्यद मोहम्मद असकरी, र्मिज़ा अज़ादार हुसैन, इब्बन भाई, आसिफ रिज़वी,इब्ने हसन,हसन आमिर समेत अन्य सैकड़ो लोग प्रमुख रुप से शामिल थे।इसी क्रम में बखशी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नाज़िर हुसैन मे भी अय्यामे फात्मी के सिलसिले की एक मजलिस हुई जिसे मौलाना सै०रज़ी हैदर साहब ने खिताब किया।मजलिस के बाद शबीहे ताबूत जनाबे फात्मा भी निकाला गया।
इसी सिलसिले की एक मजलिस 20 फरवरी मंगलवार को दिन मे 11बजे से नूरउल्ला रोड स्थित मदरसा अनवारुल उलूम मे होगी।जिसे उप प्रधानाचार्य व मौलाना सै०रज़ी हैदर साहब क़िबला समबोधित करेंगे।उक्त सूचना जावेद रिज़वी करारवी ने दी। सै०मोहम्मदअसकरी
रसूले अकरम मुहम्मदे मुसतफ़ा(स०अ०व०)की बेटी पहले इमाम हज़रत अली की शरीके हयात हज़रत हसन और हज़रत हुसैन की माँ सय्यदा ताहिरा ,फात्मतुत ज़हरा की यौमे शहादत पर तीन दिवसीय अय्यामे फात्मी पर जहाँ जगहां जगहां मजलिसें आयोजित की गईं वहीं दरियाबाद स्थित इमामबाड़ा ग़ुलाम अब्बास से शायर नजीब इलाहाबादी के संचालन मे एक जुलूस भी निकला।जिसको मौलाना सै०कलबे अब्बास साहब ने खिताब करते हुए जनाबे फात्मा ज़हरा की शहादत का ज़िक्र किया।कहा ज़ालिमों ने फात्मा ज़हरा पर जलता हुआ दरवाजा गिरा कर उन्हें दरो दिवार के बीच पीस कर शहीद कर दिया।कहा ज़ालिमो के हमले मे फात्मा की शिकम (कोख) मे पल रहे जनाबे मोहसिन भी शहीद हो गए।
मजलिस के बाद अनजुमन ग़ुनचा -ए-क़ासिमया के नौहा ख्वान शादाब ज़मन,असकरी अब्बास, शबीह अब्बास, ज़हीर अब्बास,कामरान रिज़वी, अली रज़ा रिज़वी, शबीह रिज़वी आदी ने शायर तालिब इलाहाबादी का लिखा ग़मज़दा नौहा
अस सलामो अलैके या सय्यदा, अस सलामो अलैके या फात्मा,अस सलामो अलैके या मरज़िया,अस सलामो अलैके या ताहिरा के फलक शिगाफ नारों के साथ अनजुमन के सदस्यों ने मातम करते हुए जुलूस को देर रात दरियाबाद स्थित दरगाह हज़रत अब्बास पर पहुंच कर संपन्न कराया।जुलूस मे अनजुमन हाशिमया, अनजुमन मुहाफिज़े अज़ा दरियाबाद ने भी नौहा और मातम का नज़राना पेश करते हुए जुलूस में शिरकत की।अलम ताबूत पर लोगों ने अक़िदत के फूल चढ़ा कर मन्नतें व मुरादें मांगी।जुलूस मे गु़लाम अब्बास, जावेद अब्बास की ओर से अनजूमनो को जानमाज़ भेंट की गई।जुलूस मे सैय्यद मोहम्मद असकरी, र्मिज़ा अज़ादार हुसैन, इब्बन भाई, आसिफ रिज़वी,इब्ने हसन,हसन आमिर समेत अन्य सैकड़ो लोग प्रमुख रुप से शामिल थे।इसी क्रम में बखशी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नाज़िर हुसैन मे भी अय्यामे फात्मी के सिलसिले की एक मजलिस हुई जिसे मौलाना सै०रज़ी हैदर साहब ने खिताब किया।मजलिस के बाद शबीहे ताबूत जनाबे फात्मा भी निकाला गया।
इसी सिलसिले की एक मजलिस 20 फरवरी मंगलवार को दिन मे 11बजे से नूरउल्ला रोड स्थित मदरसा अनवारुल उलूम मे होगी।जिसे उप प्रधानाचार्य व मौलाना सै०रज़ी हैदर साहब क़िबला समबोधित करेंगे।उक्त सूचना जावेद रिज़वी करारवी ने दी। सै०मोहम्मदअसकरी



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