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बसपा को समाप्त करके ही दम लेंगे स्थानीय नेता

पूर्व विधायक पूजा पाल को निकालने के बाद लग रहा है कि बसपा के स्थानीय नेता बसपा को समाप्त करने पर तुले हैं . पूजा पाल के भाजपा में जाने का आरोप पहले लगा था तो उन्होंने निष्ठा की बात कहकर रिपोर्ट लिखा दिया था , चुनाव हारने के बाद भी उनको आफर मिला तो उन्होंने फिर इनकार कर दिया .
अब उप चुनाव केवल २१ दिन में है तो कौन सी जल्दबाजी थी पार्टी से निकालने की ?
पहले कपिल मुनि करवरिया, बाजपेयी परिवार, कलेक्टर पांडेय , दीपक पटेल , श्रीमति केशरी देवी पटेल अब पूजा पाल .
संगठन के लोगों की पर्सनल आवश्यकता ना पूरी कर पाना भी कभी कभी बहाना बन जाता है बाहर निकालने का .
अगर बसपा नेता यह मैसेज भेजेंगे कि समाज मेॉ कि वे किसी के सगे नहीं तो उनके कार्यकर्ता भी समझने लगेंगे कि आप उनके भी सगे नहीं हैं .
निकाल देने से कितना नुकसान हुआ जब पार्टी में केवल चार लोग रह जायेंगे तब ही पता चलेगा .
किसी चीज का समय और तुक होता है . किसी ऐसे व्यक्ति को भी लाना हो जिसे संबंधित नेता नहीं चाहता है तो भी निकालना कौन या आप्शन है ? सब कार्यकर्ताओं  आत्मसम्मान होता है उसके साथ खिलवाड़ करना ना तो किसी संगठन को करना चाहिए ना ही किसी कार्यकर्ता को .
बैरहाल लोकतंत्र में किसी दल को समाप्त होते हुए देखना दुखद तो होता ही है .
भाजपा में शामिल होकर वे उपचुनाव में भाजपा को जिताने का काम कर सकती हैं वहीं आप किसी का समर्थन करके किसी को जिताने का काम ही कर सकते हैं . लेकिन भविष्य बहुत कुछ माफ नहीं करने वाला है .

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