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पूर्व सांसद अतीक अहमद ने कहा-जेल से छूटते ही बनाऊंगा नई पार्टी

इलाहाबाद के शियाट्स कॉलेज में मारपीट के आरोप में फंसने के बाद अखिलेश यादव ने कानपुर से उनका टिकट काट दिया था और यह खुन्नस आज भी बरकरार है.


ऑनलाइन संवाददाता
2004 में सपा के टिकट पर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की सीट से लोकसभा के लिए चुने गए अतीक अहमद 11 मार्च को होने वाले उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक रहे हैं. अतीक अहमद का आरोप है कि जिस समाजवादी पार्टी को नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने बनाया था, वह बात अब अखिलेश के नेतृत्व में नहीं रही.

आखिर क्यों है अतीक और अखिलेश में मतभेद


औरया जेल में बंद अतीक अहमद शुक्रवार इलाहाबाद जिला कोर्ट में पेशी पर आए थे उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कह दिया कि अब ये बगावत आर-पार की लड़ाई है. उन्होंने कहा कि जेल से छूटने के बाद ही अलग पार्टी बनाऊंगा. दरअसल इलाहाबाद के शियाट्स कॉलेज में मारपीट के आरोप में फंसने के बाद अखिलेश यादव ने कानपुर से उनका टिकट काट दिया था और यह खुन्नस आज भी बरकरार है.

अतीक कहते हैं कि वे जमानत मिलते ही नई पार्टी बनाएंगे. जब उनसे पूछा गया कि पार्टी का नाम क्या होगा? तो उन्होंने कहा, नाम मकसद नहीं होता है. कोई मुस्लिम वोट की ठेकेदारी कोई न करे, हम मुस्लिम वोट की खुद ठेकेदारी करेंगे. हालांकि सपा-बसपा गठबंधन पर बिफरे अतीक अहमद ने बीजेपी को झूठी पार्टी बताय. उन्होंने कहा, 'हमारी लड़ाई त्रिकोणीय है, ब्राह्मण समाज भी हमारे साथ खड़ा है. मुस्लिम मुझे वोट कर रहा है'.

विरोधियों का आरोप अतीक हैं 'वोट कटवा'


सपा द्वारा वोट कटवा और बीजेपी के डमी कैंडिडेट के आरोप पर उन्होंने कहा, 'वोट कटवा कहलाने के डर से क्या सपा के पीछे चलते रहें. मैं कभी डरा नहीं हूं." अतीक अहमद के इस बयान के बाद इस बात पर भी पूर्ण विराम लग गया जिसमें उनके करीब यह कह रहे थे कि सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष को वे सबक सिखाना चाहते हैं.'

बता दें समाजवादी पार्टी से बगावत कर जेल से चुनाव लड़ रहे अतीक के बेटे और पत्नी ने चुनाव प्रचार का पूरा जिम्मा संभाल रखा है. बेटे उमर ताबड़तोड़ चुनावी जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं. उनका दावा है कि फूलपुर में बीजेपी को हराने की ताकत सिर्फ अतीक अहमद में है.

आखिर क्या है फूलपुर का चुनावी गणित

वहीं नाम न छापने की शर्त पर अतीक के करीबी बताते हैं कि वो सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को चुनावों में सबक सिखाने के लिए मैदान में उतरे हैं. उनका कहना था कि उपचुनाव के तारीखों का ऐलान होते ही जेल में बंद अतीक अहमद ने अपने पसंद के पटेल उम्मीदवार का नाम सुझाया था. जिसे अखिलेश यादव ने ठुकरा दिया और और नागेन्द्र सिंह पटेल को टिकट दिया. इसी से नाराज अतीक खुद मैदान में उतरे हैं. करीबी सूत्र का कहना है कि अतीक अहमद कम से कम 45 हजार वोट काट सकते हैं.

इससे इतर, बेटे मोहम्मद उमर कहते हैं कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी असली नहीं है. उमर ने कहा, 'मैं जेल में पापा से मिला था. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं वह नेताजी वाली पार्टी नहीं रही'.

सपा द्वारा अतीक अहमद को बीजेपी का डमी कैंडिडेट बताने के सवाल पर उमर ने कहा, 'परिस्थितियां कितनी ही विपरीत क्यों न रही हों, लेकिन मेरे पिता ने आज तक कभी समझौता नहीं किया. फूलपुर में सभी जानते हैं कि मेरे पिता ही बीजेपी को हरा सकते हैं'.

वहीं अतीक अहमद के चुनाव लड़ने पर समाजवादी पार्टी के एमएलसी और प्रवक्ता सुनील सिंह साजन ने कहा, 'चुनाव से पहले बसपा का समर्थन मिलने के बाद लोगों को पता चल चुका है कि किसकी जीत होने वाली है. बसपा का समर्थन मिलने के बाद अतीक अहमद के चुनाव लड़ने का महत्व खत्म हो गया है. वह अपनी जीत का दावा करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन सपा की जीत पक्की है.'

गौरतलब है कि 2004 में सपा के टिकट पर अतीक अहमद ने फूलपुर से चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी. शहर उत्तरी और दक्षिण में अतीक अहमद की मुस्लिम वोटों पर अच्छी पकड़ मानी जाती है. यही वजह है कि अतीक ने निर्दलीय पर्चा भरा है. कहा जा रहा है कि अगर मुस्लिम वोट विभाजित होता है तो सपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है. डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई फूलपुर सीट के लिए 11 मार्च को मतदान होंगे. यहां से बीजेपी ने कौशलेन्द्र सिंह पटेल और कांग्रेस ने मनीष मिश्रा को मैदान में उतारा है. मतों की गिनती 14 मार्च को होगी.

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