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नैतिक मूल्यों के सृजन के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति सहज निष्ठा एवं श्रद्धा का भाव रखकर भारतीय जीवन दर्शन का अनुगामी बनना होगा...राज्यपाल

 राज्यपाल ने  विभिन्न विद्याशाखाओं में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों को 17 स्वर्ण पदक प्रदान किये। दीक्षान्त समारोह में सत्र दिसम्बर 2017 तथा जून 2018 की परीक्षा के सापेक्ष उर्तीण लगभग 21 हजार शिक्षार्थियों को उपाधि प्रदान की गयी, जिनमें छात्रों की संख्या 11173 तथा छात्राओं की संख्या 9655 रही।

 इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय का 13वां दीक्षान्त समारोह मंगलवार को सरस्वती परिसर स्थित पं0 मदन मोहन मालवीय दीक्षान्त समारोह स्थल में आयोजित किया गया। दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति  राम नाईक ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में दीक्षान्त समारोह में उपाधि प्राप्त छात्र छात्राओं को बधाई देते हुये कहा कि भारत के विकास के लिये यह आवश्यक है कि यहां का प्रत्येक नागरिक अत्याधुनिक ज्ञान-विज्ञान युगानुकूल शिक्षा ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि बदलती हुई दुनिया में आगे बढ़ने के लिये कड़ी प्रतिस्पर्धा है। आगे बढ़ने के लिये कड़ी मेहनत के साथ-साथ प्रमाणिकता और पारदर्शिता आवश्यक है। शार्टकट से आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। आत्मपरीक्षण करने से अपनी कमियां सामने आयेंगी और सफलता चरण चूमेगी। राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा की गाड़ी अब पटरी पर आयी है। नकल विहीन परीक्षायें सभी विश्वविद्यालयों में संचालित की जा रही है। इसके साथ ही दीक्षान्त समारोह का कलेण्डर भी 84 दिनों का तैयार किया गया है जिसके अन्तर्गत 24 अगस्त से 15 नवम्बर 2018 तक प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में दीक्षान्त समारोह करा लिये जायेंगे। उन्होंने कहा कि गत वर्ष का दीक्षान्त समारोह का कैलेण्डर 253 दिनों में 09 सितम्बर 2017 से लेकर 19 मई 2018 तक सम्पन्न हुआ। इस बार प्रदेश के सभी कुलपतियों को निर्देश दिया गया कि इसे तय समय सीमा में आयोजित किया जाय। उन्होंने दीक्षान्त समारोह में महिला अभ्यर्थियों को दिये गये पदकों की संख्या पर खुशी जाहिर करते हुये कहा कि महिलाओं में शिक्षा का बढ़ता प्रभाव भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है।

श्री नाईक ने कहा कि नैतिक मूल्यों के सृजन के साथ समाज और राष्ट्र के प्रति सहज निष्ठा एवं श्रद्धा का भाव रखकर भारतीय जीवन दर्शन का अनुगामी बनना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व गुरू का गौरव प्राप्त रहा है। विश्व बन्धुत्व की भावना का संदेश आज पुनः पूरे देश में फैलाने की आवश्यकता है। राज्यपाल श्री नाईक ने कहा कि भारत की शिक्षित युवा पीढ़ी का अधिकांश भाग भौतिकवादी पाश्चात संस्कृति की चकाचैध से चैंधियाया हुआ है एवं वास्तविक स्वरूप पर आवरण है। ऐसी स्थिति में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की डोर कमजोर होती जा रही है। गांव और शहरों का अन्तर बढ़ता जा रहा है। जिस कारण विकास का असन्तुलित दृश्य परिलक्षित होता है। इसका कारण शिक्षा व्यवस्था से मूल्य आधारित शिक्षा का दूर होना है।
श्री नाईक ने अगले वर्ष प्रयाग में लगने वाले महाकुम्भ की एतिहासिकता का जिक्र करते हुये कहा कि देश विदेश से आने वाले 12 करोड़ श्रद्धालुओं के मेजबानी के लिए राजर्षि टण्डन जैसे मनीषी के नाम पर स्थापित इस मुक्त विश्वविद्यालय की अहम भूमिका रहेगी।

मुख्य अतिथि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर नागेश्वर राव ने दीक्षान्त भाषण देते हुये कहा कि शिक्षा मनुष्य के मानवीय गुणों तथा व्यक्तित्व विकास का एक सशक्त माध्यम है। शिक्षा का उद्देश्य संकीर्णताओं, रूढ़ियों तथा अंधविश्वास को दूर कर हृदय के अंतःस्थल में मानव मूल्यों का बीजारोपण करना है।  प्रो0 राव ने कहा कि शिक्षा के द्वारा ही संकीर्णताओं व रूढ़िवादिता को नष्ट कर एक सुसंस्कृत एवं सभ्य समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थियों के कंधों पर ही सभ्य सुसंस्कृत समाज के निर्माण का दायित्व है।
    प्रो0 राव ने कहा कि शिक्षार्थी ऐसी शिक्षा ग्रहण करें जो उन्हें विश्व-बन्धुत्व का पाठ पढ़ाये। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले शिक्षार्थियों से कहा कि मात्र औपचारिक शिक्षा ग्रहण करने के स्थान पर वे अपने अंतःस्थल को ज्ञान से प्रकाशित करने का प्रयास करें तथा अपने आचरण की शुद्धता की ओर अवश्य ध्यान दें। इग्नू के कुलपति प्रो0 राव ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के अंदर धार्मिक सहिष्णुता एवं सद्भाव का होना आवश्यक है। मनुष्य के अंदर विद्यमान नैतिक गुण ही उसका गौरव है। उन्होंने कहा कि आदर्श राष्ट्र की स्थापना के लिए हम सभी को सभ्य सुसंस्कृत एवं नैतिक गुणों से पूर्ण होना होगा। उच्च शिक्षा के द्वारा ही स्वतंत्र चिन्तन का विकास होता है जो भविष्य में उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। प्रो0 राव ने योग शिक्षा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि वे योग विद्या अर्जित कर अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को और मजबूत बनायें। शारीरिक स्वास्थ्य भी शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग है और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का विकास होता है। प्रो0 राव ने विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया।
इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर कामेश्वर नाथ सिंह ने अतिथियों का स्वागत तथा कुलपति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि इसी सत्र से कर्मचारियों के हित संरक्षण के लिए कर्मचारी कल्याण कोष की स्थापना की गयी है। प्रो0 सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने सामाजिक दायित्व का भलीभांति निर्वाह कर रहा है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य है कि छात्र-छात्राओं की कुशलता को राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित कर सके, अपनी प्रचुर मानव सम्पदा को विभिन्न रचनात्मक केन्द्रों के लिये तैयार कर सके। राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जनोपयोगी योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान से सम्बन्धित कई पाठ्यक्रम यथा एकात्म भाववाद अंत्योदय, स्वच्छ भारत, कुम्भ एवं सुशासन पर जागरूकता पाठ्यक्रम शुरू किये गये हैं। उन्होंने कहा कि दीक्षान्त समारोह के अवसर पर पहली बार दीक्षान्त समारोह विशेष व्याख्यान माला के आयोजन से शैक्षिक वातावरण के सृजन के साथ-साथ गुणवत्ता संवर्धन भी सम्भव हो सका।

राज्यपाल श्री नाईक ने कुलाधिपति स्वर्ण पदक झ्ााँसी क्षेत्रीय केन्द्र के अन्तर्गत आने वाले अध्ययन केन्द्र फुन्दी सिंह लौना राजकीय स्नाकोत्तर महाविद्यालय जालौन की छात्रा अंजली भदौरिया को प्रदान किया। अंजली ने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में स्नातक (बी.एल.आई.एस.)की परीक्षा सत्र दिसम्बर 2017 तथा जून 2018 के सापेक्ष प्रथम प्रयास एवं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। तथा समस्त विद्याशाखाओं की स्नातक एवं स्नातकोत्तर परीक्षाओं में उत्तीर्ण समस्त स्नातक/परास्नातक शिक्षार्थियों में सर्वाधिक 85.40 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
    राज्यपाल श्री नाईक ने स्नातकोत्तर वर्ग में मानविकी विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक उपरदहा डिग्री कालेज, उपरदहा (बरौत) इलाहाबाद अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0ए0 (अर्थशास्त्र) के छात्र संतोष कुमार सिंह को, समाज विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक कालीचरण डिग्री कालेज, लखनऊ अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0ए0 (समाजशास्त्र) के छात्र अमरनाथ गुप्ता को, प्रबन्धन अध्ययन विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक बप्पा श्री नारायण वोकेशनल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखनऊ अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0काम की छात्रा दीपाक्षी अग्रवाल को, कम्प्यूटर एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक पं0 कैलाश नाथ इन्स्टीटयूट आॅफ टेक्नोलाॅजी एण्ड मैनेजमेन्ट, सिधारी, आजमगढ़ अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0सी0ए0 के छात्र धर्मेन्द्र यादव को, शिक्षा विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक हीरालाल यादव बालिका डिग्री कालेज, लखनऊ अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0ए0 (शिक्षाशास्त्र) की छात्रा रीना शाक्य को तथा विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक बरेली कालेज बरेली अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0एस0सी0(जैव रसायन) की छात्रा सृष्टि भल्ला को प्रदान किया।
    इसी प्रकार राज्यपाल श्री नाईक ने स्नातक वर्ग में मानविकी विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक फुन्दी सिंह लौना राजकीय स्नातकोेत्तर महाविद्यालय, जालौन अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में स्नातक (बी0एल0आई0एस0) की छात्रा अंजली भदौरिया को, समाज विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, लखनऊ अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत बी0ए0 की छात्रा शारदा कुमारी को, प्रबन्धन अध्ययन विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक श्री रतीराम महाविद्यालय, मथुरा अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत बी0काम की छात्रा इला राना को, कम्प्यूटर एवं सूचना विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक बी0सी0आई0एस0 इन्फोटेक कैम्पस, वाराणसी अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत बी0सी0ए0 के छात्र आशीष कुमार वर्मा को तथा विज्ञान विद्याशाखा से विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक सरदार पटेल स्मारक महाविद्यालय लारपुर अम्बेडकरनगर अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत बी0एस0सी0 के छात्र रजीउल्लाह को प्रदान किया।

    राज्यपाल श्री नाईक ने इस बार पांच मेधावी शिक्षार्थियों को दानदाता स्वर्णपदक से सम्मानित किया। जिनमें श्री कैलाशपत नेवेटिया स्मृति स्वर्णपदक विश्वविद्यालय मुख्य परिसर अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0बी0ए0 की छात्रा सलिला तिवारी को, स्वर्गीय अनिल-मीना चक्रवर्ती स्मृति स्वर्ण पदक नेताजी सुभाष चन्द्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय लखनऊ अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत बी0ए0 की छात्रा शारदा कुमारी तथा विश्वविद्यालय मुख्य परिसर अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0ए0 (राजनीति विज्ञान) की छात्रा आराधना चैबे को, प्रो0 एम0पी0 दुबे पर्यावरण/गांधी चिन्तन एवं शांति अध्ययन उत्कृष्टता स्वर्णपदक आर0बी0एस0 कालेज, आगरा अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0ए0 (समाजकार्य) के छात्र अजय कुमार को एवं प्रो0 एम0पी0 दुबे दिव्यांग मेधा स्वर्ण पदक बप्पा श्री नारायण वोकेशनल स्नातकोत्तर  महाविद्यालय, लखनऊ अध्ययन केन्द्र से पंजीकृत एम0ए0 (अंगे्रजी) की छात्रा अर्चना दुबे को प्रदान किया।

राज्यपाल श्री रामनाईक को विश्वविद्यालय की तरफ से कुलपति प्रो0 कामेश्वर नाथ सिंह ने केरल के बाढ़ पीढितों के लिए इकटठा की गयी 1 लाख 43 हजार रूपये धनराशि का चेक प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष के लिये सौंपा जिसे राज्यपाल श्री नाईक ने मानवता के लिए एक मिसाल बताते हुए विश्वविद्यालय के इस प्रयास की सराहना की।
इस अवसर पर राज्यपाल श्री रामनाईक ने विश्राम कक्ष का शिलान्यास किया। प्रारम्भ में विश्वविद्यालय कुलगीत एवं राष्ट्रगीत विश्वविद्यालय की छात्राओं ने प्रस्तुत किया। राज्यपाल श्री रामनाईक, मुख्य अतिथि इग्नू के कुलपति प्रो0 नागेश्वर राव तथा उ0प्र0 राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 कामेश्वर नाथ सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन कर दीक्षान्त समारोह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो0 सिंह ने राज्यपाल श्री नाईक तथा मुख्य अतिथि प्रो0 राव को स्मृति चिन्ह तथा अंगवस्त्रम प्रदान किया। दीक्षान्त समारोह का संचालन डाॅ0 विनोद कुमार गुप्त तथा डाॅ0 श्रुति ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर इंजी0 हर्षबर्द्धन बाजपेयी, विधायक, शहर उत्तरी, श्री विक्रमाजीत मौर्य विधायक फाफामऊ, श्री लाल बहादुर विधायक, मंझनपुर, श्री अजय सिंह, विधायक हर्रेया बस्ती, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एस0पी0 सिंह, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 राजेन्द्र प्रसाद, न्यायमूर्ति सुधीर नारायण, महामहोपाध्याय प्रो0 राजेन्द्र मिश्र पूर्व कुलपति, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी, प्रो0 के0बी0 पाण्डया, पूर्व कुलपति, नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय, इलाहाबाद, प्रो0 हरिदत्त शर्मा, प्रो0 ए0एन0 द्विवेदी, प्रो0 बी0एन0 सिंह, डाॅ0 सुनीता सिंह, आदि उपस्थित रहे। 

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