Exclusive : विवेक हत्याकांड के आरोपी सिपाहियों का सोशल मीडिया के माध्यम से बचाव करने वाला सिपाही निलंबित, दिया इस्तीफा, पुलिस विभाग में हड़कंप
एटा ब्रेकिंग। लखनऊ में हुए विवेक तिवारी हत्याकांड के आरोपी सिपाहियों का सोशल मीडिया के माध्यम से बचाव करने,पुलिस सिस्टम की आलोचना करने पर निलंवित किये गए एटा पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सर्वेश चौधरी ने एटा एस एस पी को इस्तीफा दे दिया हौ। एस एस पी एटा से इस्तीफा स्वीकार करने की मांग की है और कहा कि 1861 कि पुराना पुलिस कानून बदलकर आज के मुताविक बनना चाहिए।
कहा पुलिस की न डी जीपी संज्ञान लेते है और न ही नेता उसकी सुनते हैं ।आज दिन भर सर्वेश चौधरी को इस्तीफा न देने के लिए मनाने का दौर चलता रहा, अलग अलग पुलिस अधिकारियों और परिजनों ने कई बार समझाया पर वो नही माना। पूरे जिले के पुलिस विभाग में होती रही सर्वेश के इस्तीफा देने की चर्चा।
अगर पुलिस विभाग की सरगर्मियों पर गौर करे तो यूपी के अधिकांश जिलों में पुलिस लामबंद होती दिख रही है।
हालांकि यूपी पुलिस हमेशा अधिकारियों के इशारे पे चलती रही है लेकिन वर्तमान परिपेच्या पे अब कप्तानों को कई चुनोतियों का सामना करना पड़ सकता है।
पुलिसवालो का मानना है कि कानून के रखवाली का जिम्मा उठाने वाले लोगो के कप्तान सूबे के मुखिया उनका बचाव क्यों नही करते। अगर यही स्थिति रही तो आनेवाले दिनों में पुलिस सुरक्षा कु मांग करने वाले भी असुरक्षित महसूस करेंगे। दबी जुबान पोलिसवालो को कहते हुए सुना जा सकता है कि कुसी भी तरह की ड्यूटी लगने पर आलाधिकारियों से इस बात का परमीशन जरूर लेवे कि हथियार का उपयोग किस हद तक वह करे। अगर आलाधिकारियों ने विभाग को मैनेज कंट्रोल नही किया तो आने वाले समय मे एक बड़ी चुनोती इनके सामने होगी।
कहा पुलिस की न डी जीपी संज्ञान लेते है और न ही नेता उसकी सुनते हैं ।आज दिन भर सर्वेश चौधरी को इस्तीफा न देने के लिए मनाने का दौर चलता रहा, अलग अलग पुलिस अधिकारियों और परिजनों ने कई बार समझाया पर वो नही माना। पूरे जिले के पुलिस विभाग में होती रही सर्वेश के इस्तीफा देने की चर्चा।
अगर पुलिस विभाग की सरगर्मियों पर गौर करे तो यूपी के अधिकांश जिलों में पुलिस लामबंद होती दिख रही है।
हालांकि यूपी पुलिस हमेशा अधिकारियों के इशारे पे चलती रही है लेकिन वर्तमान परिपेच्या पे अब कप्तानों को कई चुनोतियों का सामना करना पड़ सकता है।
पुलिसवालो का मानना है कि कानून के रखवाली का जिम्मा उठाने वाले लोगो के कप्तान सूबे के मुखिया उनका बचाव क्यों नही करते। अगर यही स्थिति रही तो आनेवाले दिनों में पुलिस सुरक्षा कु मांग करने वाले भी असुरक्षित महसूस करेंगे। दबी जुबान पोलिसवालो को कहते हुए सुना जा सकता है कि कुसी भी तरह की ड्यूटी लगने पर आलाधिकारियों से इस बात का परमीशन जरूर लेवे कि हथियार का उपयोग किस हद तक वह करे। अगर आलाधिकारियों ने विभाग को मैनेज कंट्रोल नही किया तो आने वाले समय मे एक बड़ी चुनोती इनके सामने होगी।


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