कुंभ संस्कृति 2019: संगम में लग रहा स्वाद का तड़का
तंबुओं की नगरी में इन दिनों लोक संस्कृतियों और कलाओं की ही नहीं स्वाद का भी संगम हो रहा है।
अलग-अलग अखाड़ों में साधु-संतों का रहन सहन जितना दिव्य है उतना ही समृद्ध उनका रसोईघर भी है। जिनमें महंतों की देख रेख में रसोइये हर दिन तरह-तरह के लजीज व्यंजन तैयार करते हैं।
अखाड़ों में प्रतिदिन सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक का मेन्यू तैयार होता है। यहां आपको दक्षिण भारतीय मारवाड़ी, पूर्वांचली, गुजराती, पंजाबी व्यंजनों का स्वाद चखने को मिलेगा। इनमें ब्रेड पकौड़ा, ढोकला, जलेबी, पोहा, सेव, चना, कढ़ी चावल, राजमा चावल, गाजर का हलवा, मूंग दाल हलवा, मिक्स वेजीटेबल, रसगुल्ला, बालूशाही, इमरती, मिक्स दाल, पुलाव, पूरी, मिस्सी रोटी, तवा रोटी, मक्के की रोटी, सरसोें का साग, दाल मखनी, तंदूरी रोटी समेत बहुत से व्यंजन शामिल हैं। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के महाराज रामदास ने बताया कि जिस दिन जिस महंत की भड़ारा करने की जिम्मेदारी होती है, वह अपनी पसंद का मेन्यू तय करते हैं। महंत अलग-अलग प्रांतों से हैं, इसलिए यह विविधता खाने में भी दिखती है।
सुबह चार बजेे जग जाती है रसोई
अखाड़ों की रसोईघर में सुबह चार बजे चूल्हा जल जाता है। इसके बाद से ही शुरू हो जाता है नाश्ता और फिर खाना बनने का सिलसिला जो रात तक चलता रहता है। अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़ा के अन्न क्षेत्र के व्यवस्थापक अरविंद मिश्रा ने बताया कि सुबह चार बजे ही रसोई जग जाती है। कारीगर शिफ्ट के हिसाब से काम करते हैं।

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