UPPSC : पीसीएस-जे मेंस की तारीख में बदलाव से इनकार
परवेज़ आलम
प्रातःकाल संवाददाता। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) किसी भी दशा में पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा की तारीख बदलने को तैयार नहीं है। सोमवार को अभ्यर्थियों से हुई वार्ता में आयोग के सचिव जगदीश ने कुंभ और यूपी बोर्ड की परीक्षाओं का हवाला देते हुए पीसीएस-जे मेंस की तिथि बदलने से साफ इंकार कर दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि अब वे कोर्ट की शरण में जाएंगे। अभ्यर्थियों ने तिथि बढ़ाए जाने की मांग को लेकर आयोग में प्रदर्शन भी किया।
प्रातःकाल संवाददाता। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) किसी भी दशा में पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा की तारीख बदलने को तैयार नहीं है। सोमवार को अभ्यर्थियों से हुई वार्ता में आयोग के सचिव जगदीश ने कुंभ और यूपी बोर्ड की परीक्षाओं का हवाला देते हुए पीसीएस-जे मेंस की तिथि बदलने से साफ इंकार कर दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि अब वे कोर्ट की शरण में जाएंगे। अभ्यर्थियों ने तिथि बढ़ाए जाने की मांग को लेकर आयोग में प्रदर्शन भी किया।
आयोग के कैलेंडर में पीसीएस-जे मुख्य परीक्षा 30 और 31 जनवरी एवं एक फरवरी को प्रस्तावित है। आयोग ने पांच जनवरी को पीसीएस-जे प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया है। इस हिसाब से मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए 25 दिनों से भी कम समय मिल रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग कोर्ट में जो हलफनामा दिया है, उसमें प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित करने से लेकर मुख्य परीक्षा तक 30 दिनों का समय दिया गया है। परीक्षा तिथि बढ़ाने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को आयोग में प्रदर्शन किया। इस दौरान हंगामा भी हुआ। प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सचिव और अभ्यर्थियों के बीच वार्ता कराई गई।
सचिव ने अभ्यर्थियों से कहा कि चार फरवरी को मौनी अमावस्या का शाही स्नान है। प्रशासन ने इस पर्व के एक दिन पहले से लेकर एक दिन बाद तक कोई परीक्षा न कराए जाने का आदेश दिया है। इसके बाद यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में मुख्य परीक्षा के लिए आयोग को केंद्र नहीं मिलेंगे।
अगर, किसी तरह केंद्र का इंतजार कर लिया गया तो मुख्य परीक्षा देर से होने पर कॉपियां जांचने में भी विलंब होगा। ऐसे में आयोग की ओर से कोर्ट में दिया गया हलफनामा प्रभावित होगा। इन परिस्थितियों में परीक्षा की तिथि नहीं बदल जा सकती। वार्ता में शामिल रहे न्यायिक सेवा के प्रतियोगी छात्र राम करन निर्मल, विजय लक्ष्मी उपाध्याय, कौशलेंद्र प्रताप सिंह, सूर्यकांत शर्मा और अमित श्रीवास्तव का कहना है कि प्रतियोगी छात्र अब कोर्ट की शरण में जाएंगे।
सचिव ने अभ्यर्थियों से कहा कि चार फरवरी को मौनी अमावस्या का शाही स्नान है। प्रशासन ने इस पर्व के एक दिन पहले से लेकर एक दिन बाद तक कोई परीक्षा न कराए जाने का आदेश दिया है। इसके बाद यूपी बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में मुख्य परीक्षा के लिए आयोग को केंद्र नहीं मिलेंगे।
अगर, किसी तरह केंद्र का इंतजार कर लिया गया तो मुख्य परीक्षा देर से होने पर कॉपियां जांचने में भी विलंब होगा। ऐसे में आयोग की ओर से कोर्ट में दिया गया हलफनामा प्रभावित होगा। इन परिस्थितियों में परीक्षा की तिथि नहीं बदल जा सकती। वार्ता में शामिल रहे न्यायिक सेवा के प्रतियोगी छात्र राम करन निर्मल, विजय लक्ष्मी उपाध्याय, कौशलेंद्र प्रताप सिंह, सूर्यकांत शर्मा और अमित श्रीवास्तव का कहना है कि प्रतियोगी छात्र अब कोर्ट की शरण में जाएंगे।


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