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सुदामा चरित्र की कथा सुनकर दर्शक हुए भावविभोर



कौशाम्बी, *सुदामा चरित्र की कथा सुनकर दर्शक हुए भावविभोर*

*करारी* करारी नगर के सोनारन टोला मे चल रहे एक सप्ताह के श्रीमद भागवत कथा पुराण महायज्ञ में रविवार को भक्त सुदामा चरित्र की कथा का रसपान कराया गया। श्रीधाम चित्रकूट से पधारे पं. बृजमोहन शास्त्री जी महाराज ने सुदामा चरित्र सुनाते हुए कहा कि जिसके दिल में भगवान के प्रति अनुराग होता है उसे कुछ भी मांगने की जरूरत नहीं पड़ती। परब्रम्ह परमात्मा सर्वज्ञाता हैं तथा वह अपने भक्तों के संकट दूर करने के लिये सदैव तत्पर रहते हैं। बस आवश्यकता है तो सिर्फ सच्चे मन से भगवान के श्रीचरणों में खुद को समर्पित करने की।
 शास्त्री जी महाराज ने बताया कि सुदामा जी बहुत ही गरीब थे फिर भी वह अपने सखा भगवान द्वारिकाधीश से कुछ मांगने नहीं जाते थे। जगतपति श्रीकृष्ण से अपनी मित्रता का जिक्र उन्होंने कभी अपनी धर्मपत्नी से भी नहीं किया। बताया कि सुदामा जी निष्काम भक्ति का प्रतीक हैं। शास्री जी महाराज ने बताया कि प्रकृति से विलग होने पर निष्काम भक्ति बनती है तथा भगवान को निष्काम भक्ति प्रिय है इस लिये न तो सुदामा जी ने भगवान श्री कृष्ण से कुछ मांगा और न ही भगवान ने सुदामा जी को ही कुछ दिया। उन्होंने जो भी दिया वह सुदामा जी की पत्नी सुशीला के मनःसंकल्प के कारण दिया। शास्त्री जी महाराज ने श्रीकृष्ण सुदामा मिलन की कथा का बहुत ही रोचक एवं भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि सुदामा से मिलने के बाद भगवान श्री कृष्ण के आंशू नहीं थम रहे हैं। वह अपने बाल सखा की दीनहीन दशा देख कर व्याकुल हैं। यही तड़प भगवान की हर उस भक्त के लिये होती है जो खुद को ईश्वर में अर्पण कर देता है। कथा के दौरान कलाकारों द्वारा सुदामा जी की भव्य झांकी सजाई गई जिसके दर्शनों के लिये सैकड़ों लोग उमड़ पडे़। व्यास जी के साथ उनकी टीम में संगीतज्ञ विजय बृजवासी, मदन बृजवासी, देव बृजवासी एवं विकाश बृजवासी इस मौके पर मंगलदास केशरवानी, श्यामसुंदर केशरवानी, दिलीप कुमार केशरवानी, शौम्या केशरवानी, बबली केशरवानी, जगदीश केशरवानी व ओम बाबू, रमेश जायसवाल, आकाश जायसवाल, प्रेम केशरवानी   आदि सहित सैकड़ों भक्तगण मौजूद रहे।

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