आबीदे बीमार ज़ैनुल आबेदीन की शहादत पर दहकते अंगारों पर हुआ मातम
"" करबला काँप उठी खुल्द में रोए नबी ""
"" बेड़ियाँ थाम के जब आबीदे बीमार चले ""
चौथे इमाम हज़रत ज़ैनुल आबेदीन की यौमे शहादत पर दरियाबाद की धार्मिक संस्था तहफ्फुज़े अज़ा सोसाईटी के ओर से इमामबाड़ा नवाब बेगम (बड़ा घर) मैदान में एक लहद बना कर दहकते हुए अंगारों पर नंगे पैर चलते हुए अज़ादारों ने मातम किया वहीं हज़ारों लोगों ने इमामबाड़े से जुलूस की शक्ल में शबीहे ताबूत इमाम ज़ैनुल आबेदीन और अलम मुबारक के साथ साथ चल कर तेज़ धार की छूरीयों से लैस ज़जीरों से पुश्तज़नी कर अपने आप को लहुलोहान कर लिया।कार्यक्रम की शुरुआत शायर नायाब बलयावी की पेशख्वानी से हुई ।इमामे जुमा शिया जामा मस्जिद मौलाना हसन रज़ा ज़ैदी ने हज़रत ज़ैनुल आबेदीन पर ढाए गए मुसीबत की दास्ताँ बयान की।शायर नजीब इलाहाबादी के संचालन में हुए मातमी कार्यक्रम में दिल्ली के मौलाना नज़र मोहम्मद साहब क़िबला ने तफसीली खेताब करते हुए चौथे इमाम ज़ैनुल आबेदीन की शहादत और करबला के मैदान पर बीमारे करबला को यज़ीदी लशकर द्वारा हथकड़ीयों व बेड़ियों मे जकड़ कर कशाँ कशाँ फिराए जाने और तमाम मज़ालिम का ज़िक्र किया तो हर तरफ से सिसकियों और आहोबुका की सदा गुंजने लगी।इस बीच सभी लाईटों को बुझा कर इमामबाड़ा नवाब बेगम से इमाम ए सज्जाद का ताबूत चमेली व गुलाब के फूलों से सजा कर निकाला गया।वहीं सोसाईटी के नौजवान हाथों मे हरे,लाल, काले व सफेद परचम लहराते साथ साथ चले।दहकते अंगारों पर मातम करने को बनी लहद के इर्द गिर्द बड़ी संख्या में मौजूद मातमदारों ने ज़नजीरी मातम के साथ दहकते हुए अंगारों पर चलते हुए मातम किया।अन्तिम में डॉ मुन्तज़िर मेंहदी की तक़रीर से कार्यक्रम का समापन हुआ।इस मौक़े पर इमामबाड़ा नवाब बेगम के मुतावल्लि यासिर सिब्तैन,फसाहत हुसैन,हैदर अली,आग़ा सरदार हुसैन,क़ैसर सिब्तैन,मशहद अली खाँ,सै०मो०अस्करी,फरहत अली,शहनवाज़ हुसैन,रानू आदि मौजूद रहे।


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