महाराष्ट्र: सुप्रीम कोर्ट में कल फिर होगी सुनवाई, आज नहीं दिया कोई आदेश
सभी पक्षों को नोटिस जारी-वो दस्तावेज पेश किए जाएं जिसके आधार पर राज्यपाल ने फड़नवीस व पवार को शपथ दिलाई
विशेष संवाददाता प्रातःकाल
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री पद की एवं एनसीपी के अजीत पवार को उप मुख्यमंत्री पद की आनन-फानन में शपथ दिलाए जाने के खिलाफ कांग्रेस, एनसीपी व शिवसेना की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों एनवी रमन्ना, अशोक भूषण व संजीव खन्ना की बेंच ने आज रविवार के दिन विशेष रूप से सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि तुषार मेहता कल सुबह तक वो दस्तावेज पेश करें जिसके आधार पर राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस व अजीत पवार को शपथ दिलाई। अब इस मामले में कल सुबह साढ़े दस बजे सुनवाई होगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया।
महाराष्ट्र के राज्यपाल की तरफ से कोर्ट में अटार्नी जनरल वेणुगोपाल ने पक्ष रखा। महाराष्ट्र भाजपा की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा जबकि कांग्रेस-एनसीपी की तरफ से मनु सिंघवी व कपिल सिब्बल ने बहस की। तुषार मेहता एवं शिवसेना सांसद गजानन कीर्तिकार भी कोर्ट में उपस्थित थे। कांग्रेस, एनसीपी एवं शिवसेना की ओर से महाराष्ट्र में 24 घंटे के अंदर सदन में बहुमत साबित किए जाने का आदेश दिए जाने की मांग की गई थी।
शिवसेना की ओर से मामले में बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस नेता एवं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आज रविवार के दिन जजों को तकलीफ़ देने के लिए हमें कष्ट है, इस पर जस्टिस रमन्ना ने कहा कि कोई बात नहीं ये हमारा फर्ज है। कपिल सिब्बल ने 15 मिनट तक बहस की। इसके बाद भाजपा की ओर से मुकुल रोहतगी ने बहस की। मुकुल रोहतगी ने कहा कि याचिका में कई तकनीकी खामियां हैं, उन्होने ये भी कहा कि विरोधी पक्ष को पहले हाईकोर्ट जाना चाहिए था सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए। मुकुल रोहतगी ने आज रविवार के दिन सुनवाई किए जाने पर भी सवाल उठाया।
कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर भाजपा के पास बहुमत है तो आज ही सदन में साबित करें। एनसीपी की ओर से कांग्रेस नेता एवं वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को ये भी बताया कि अजीत पवार को एनसीपी विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया है और इसकी जानकारी राज्यपाल को भी दे दी गई है। कांग्रेस, एनसीपी व शिवसेना की ओर से कोर्ट से मांग की गई थी कि कर्नाटक की तरह महाराष्ट्र में भी 24 घंटे के भीतर बहुमत साबित किए जाने का आदेश दिया जाए।
विशेष संवाददाता प्रातःकाल
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में भाजपा के देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री पद की एवं एनसीपी के अजीत पवार को उप मुख्यमंत्री पद की आनन-फानन में शपथ दिलाए जाने के खिलाफ कांग्रेस, एनसीपी व शिवसेना की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों एनवी रमन्ना, अशोक भूषण व संजीव खन्ना की बेंच ने आज रविवार के दिन विशेष रूप से सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि तुषार मेहता कल सुबह तक वो दस्तावेज पेश करें जिसके आधार पर राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस व अजीत पवार को शपथ दिलाई। अब इस मामले में कल सुबह साढ़े दस बजे सुनवाई होगी। कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया।
महाराष्ट्र के राज्यपाल की तरफ से कोर्ट में अटार्नी जनरल वेणुगोपाल ने पक्ष रखा। महाराष्ट्र भाजपा की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पक्ष रखा जबकि कांग्रेस-एनसीपी की तरफ से मनु सिंघवी व कपिल सिब्बल ने बहस की। तुषार मेहता एवं शिवसेना सांसद गजानन कीर्तिकार भी कोर्ट में उपस्थित थे। कांग्रेस, एनसीपी एवं शिवसेना की ओर से महाराष्ट्र में 24 घंटे के अंदर सदन में बहुमत साबित किए जाने का आदेश दिए जाने की मांग की गई थी।
शिवसेना की ओर से मामले में बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस नेता एवं वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आज रविवार के दिन जजों को तकलीफ़ देने के लिए हमें कष्ट है, इस पर जस्टिस रमन्ना ने कहा कि कोई बात नहीं ये हमारा फर्ज है। कपिल सिब्बल ने 15 मिनट तक बहस की। इसके बाद भाजपा की ओर से मुकुल रोहतगी ने बहस की। मुकुल रोहतगी ने कहा कि याचिका में कई तकनीकी खामियां हैं, उन्होने ये भी कहा कि विरोधी पक्ष को पहले हाईकोर्ट जाना चाहिए था सीधे सुप्रीम कोर्ट क्यों आए। मुकुल रोहतगी ने आज रविवार के दिन सुनवाई किए जाने पर भी सवाल उठाया।
कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर भाजपा के पास बहुमत है तो आज ही सदन में साबित करें। एनसीपी की ओर से कांग्रेस नेता एवं वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट को ये भी बताया कि अजीत पवार को एनसीपी विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया है और इसकी जानकारी राज्यपाल को भी दे दी गई है। कांग्रेस, एनसीपी व शिवसेना की ओर से कोर्ट से मांग की गई थी कि कर्नाटक की तरह महाराष्ट्र में भी 24 घंटे के भीतर बहुमत साबित किए जाने का आदेश दिया जाए।


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