जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र को 41 लाख रुपए की नौकरी
जामिया में एक इंजीनियरिंग के छात्र को माइक्रोसॉफ्ट ने 41 लाख का पैकेज ऑफ़र किया है। बहुत अच्छी बात है, किसी साथी को इस बेरोजगारी और नौकरी के छीने जानें की दुखद खबरों के बीच एक सुखद खबर की तरह इस खबर को देखते है। लेकिन यहां एक सवाल बनता है कि इसमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्लेसमेंट सेल का क्या योगदान है ? जामिया प्रशासन इतना क्यों हो हल्ला मचाने लगा ? जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्लेसमेंट सेल के लिस्ट में माइक्रोसॉफ्ट का नाम ही नहीं है, और ना ही ये कंपनी जामिया मिल्लिया इस्लामिया कैंपस सलेक्शन के लिए अाई हैं। जिस छात्र का नाम लेके जामिया प्रशासन वाहवाही बटोर रही है उसके सलेक्शन की प्रक्रिया डायरेक्ट कंपनी के ऑनलाइन आवेदन के जरिए हुआ है जो पिछले साल के नवंबर के महीने में ही संपन्न हुआ था। कंपनी द्वारा ये ऑनलाइन आवेदन किसी भी छात्र और युवा को नौकरी पाने के लिए निमंत्रण करता है और कंपनी अपने स्तर पर इसकी जांच अन्य तरीके से चयन करती है इस प्रक्रिया में किसी भी तरह से जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन का कोई योगदान नहीं है, ये उस अभ्यार्ती की मेहनत का परिणाम है। फिर ये सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ की इस छात्र के नौकरी की खबर को इतना प्रसारित किया जाने की जरूरत पड़ी। उसकी वजह है जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने लगातार यूजीसी, मानव संसाधन विभाग एवं कई जगहों पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों को प्लेसमेंट की कोई सटीक व्यवस्था नहीं किए जाने की शिकायत किया था। प्लेसमेंट सेल के नाम पर हर साल छात्रों को एक आवेदन भरने को कहा जाता है, लेकिन उसका कोई खास फायदा आज तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया के किसी भी छात्रों को नहीं मिला। इन हालातों में सवाल कुछ और ही सामने आता है, क्या केवल एक छात्र को नौकरी मिल जाने से विश्वविद्यालय बहुत अच्छा हो जाता है और बाक़ी कई ऐसे छात्र है जिन्हें पांच हज़ार रुपए महीने कि भी नौकरी नही मिल पा रही है। सरकार जिस तरह से चाल चलती है वहीं चाल जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन चल रही है, वो यह है कि सरकार जिस तरह से किसी एक चीज़ का इतना विज्ञापन करती है कि बाक़ी सबकुछ अपने आप बेहतर लगने लगेगा।
तारीफ तो तब होगी जब इस तरह का ऑफर सभी छात्रों को मिले। प्रशासनप्रशासन के लोग साथ ही साथ ये क्यों नही कहते कि हमारे प्लेसमेंट का स्तर इतना गिर गया है कि फाइनल ईयर स्टूडेंट्स को इंटर्नशाला पर डाटा ऑपरेटिंग और कॉल सेंटर का काम दे रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों को एक - एक करके पुलिस उठा रही उसपे भी बोलना चाहिए था कुलपति को, जामिया प्रशासन को, क्यों नहीं ट्वीट किया, क्यों नही बोला कि एक गर्भवती शोध की छात्रा को जेल में बंद करके रखा है, पूरी दुनिया में अमन पसंद लोगों ने तो आवाज़ बुलंद किया। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रशासन में ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को नींद कैसे आ जाती है ? वाइस चांसलर मैडम बोलती है कि सब मेरे बच्चें है, तो क्या वो अपने बच्चों से ऐसा ही सलूक में पेश आती है ? पूरे जामिया इलाके में हजारों छात्र बिना खाना पीना के किस हालात में रह रहे है, उनके मकान मालिकों के द्वारा उनसे किराया कि मांग कि जा रही है, कभी सुध ली अपने बच्चों की ? इस मुद्दे पर भी बोलना चाहिए था। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हर लगभग 10 हज़ार से अधिक छात्र प्रवेश लेते हैं।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में लगभग 100-150 विषयों की पढ़ाई कारवाई जाती है, देश में जिस प्रकार से जॉब की कमी अाई, नए जॉब तो पहले से कम थे जो पहले से नौकरी कर रहे हैं या तो उनको नौकरी से निकाला जा रहा है, या फिर उनकी सलैरी काट करके दी जा रही है। इन हालातों में किसी एक को नौकरी मिलने की इस तरह से वाहवाही बटोरी जा रही है, उससे दूसरे छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक तनाव का अंदाज़ा भी है जामिया प्रशासन को ? कहां है जामिया का सुप्रसिद्ध मनोविज्ञान विभाग क्यों नहीं बात कर रहा है,प्रशासनप्रशासन से ? इस तरह की खबरें दूसरे छात्रों को जिन्हें नौकरी नहीं मिली है और नौकरी के लिए दर दर भटक रहे हैं उनके मनोदशा पर क्या असर पड़ रहा होगा ?
सामाजिक अध्ययन से जुड़े छात्रों के लिए नौकरी की बेहद कमी है। रोज़गार के अवसर मिलना एक बेहद गंभीर समस्या बनी हुई है, नौकरी नहीं मिलने की वजह से छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है, भारत एक युवा देश है और आज युवाओं में सबसे ज्यादा चिंता पढ़ाई के बाद नौकरी को लेकर रहती है, और जब नए रोज़गार के अवसर प्रदान नहीं हो रहे है, आत्मविश्वास की कमी परिवार की चिंता से छात्रों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है, इन हालातों से निपटने के लिए देश भर में सभी विश्वविद्यालयों में इन हालातों में छात्रों के लिए एक अच्छे काउंसलिंग की जरूरत है, सिर्फ नाम का बनाने की जरूरत नहीं है, ज़मीनी स्तर पर इन हालातों से निपटने की तैयारी करनी चाहिए।
देश में जब Covid19 की वजह से लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था कमज़ोर पड़ रहा है, रोज़गार की कमी पहले से ही थी। इन हालातों के बारे में सरकार और जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन को सोचना चाहिए और कोई ठोस कदम उठाने की कोशिश करनी चाहिए।
सिर्फ डिग्री देना एक विश्वविद्यालय की ज़िम्मेदारी नहीं होती है, उस डिग्री का सही इस्तेमाल हो छात्रों का भविष्य बेहतर बने ये सब ज़िम्मेदारी भी होती है क्या इन जवाबदेही को सुनिश्चित करने की कोशिश की गई या की जा रही है ?
वहीं दूसरी तरफ हॉस्टल खाली करवाना था तो बस में लड़के और लड़कियों को कश्मीर भेज दिया। क्या सिर्फ कश्मीर के ही बच्चे पढ़ते है ? क्या जामिया प्रशासन के अधिकारी भी अपने बच्चों के साथ ऐसा ही सलूक करते है क्या? क्या वो इस वक्त जब छात्र अपने घरों से सैकड़ों- हजारों किलोमीटर दूर दिल्ली में रहते है, उनके लिए तो जामिया मिल्लिया इस्लामिया ही उनका परिवार हुआ, इसलिए जामिया प्रशासन के अधिकारीयों को बड़ा दिल दिखाते हुए उन सभी बच्चों का ख़्याल रखने की कोशिश करना चाहिए।
क्या कुलपति महोदया अपने बच्चों के लिए यही रवैया अपनाती है ? पूरे देश के छोटे छोटे गांव और शहर के बच्चें जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पढ़ने आते है, हजारों किलोमीटर दूर दराज से बच्चे अच्छी शिक्षा के लिए जामिया आते, उनमें सबसे ज़्यादा गरीब घर के बच्चे होते है जिनकी पारिवारिक आमदनी न्यूनतम दर पर होती है। जब आज पूरे विश्व इस कोरोना वायरस जैसे महामारी से लड़ रहा है।
पुरा भारत बंद पड़ा है, लोग आर्थिक रूप से कमज़ोर पड़ गए हैं, ऐसे में यह दवाब जमिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों पर भी पड़ रहा है, जो दिल्ली के अलग अलग कोनो में फंसे हुए हैं, उनकी समस्याओं के बारे में भी जमिया प्रशासन को सोचना चाहिए था, जैसे कोटा एवम् अन्य जगहों पर फंसे छात्रों को वहां से उनके घरों तक भेजा गया, ऐसी ही व्यवस्था जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन को भी करना चाहिए ताकि जो बच्चे किराए के मकान में रहते हैं उन्हें भी उनके घरों तक भेजे जाने की व्यवस्था करनी चाहिए। वैसे आम दिनों में एक कमरे के फ्लैट में 5-10 बच्चे रहते है, उनके खाने पीने जैसे बेसिक जरूरतों के लिए क्या प्रशासन को कुछ करना चाहिए या नहीं ?
क्या जामिया प्रशसन की कोई जवाबदेही है या नहीं ?
जामिया में जो किताबों में पढ़ाई कारवाई जाती है उससे पहले खुद पर लागू किया है प्रशासन ने ?
मानव अधिकारों की रक्षा कैसे करें ये पढ़ाया जाता है क्या उसका खुद पालन किया जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रशासन ने ?
सरकार की गुलामी कीजिए लेकिन थोड़ी सी इंसानियत को जगा भी दीजिए सर और मैडम।
कल जब आप क्लास में बच्चो को पढ़ने के लिए जाएंगे तो क्या आप नज़रे मिला पायेंगे।
*मैं बोलूं तो इल्ज़ाम है बग़ावत का*
*मैं चुप रहूँ तो बड़ी बेबसी सी होती है* 😞
*-बशीर बद्र*
✒️ *लारैब अहमद नियाज़ी* ✍️
*छात्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया*
#छात्र_आपको_कभी_माफ_नहीं करेंगे।


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