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देश में निर्णायक मोड़ पर कोरोना से जंग is


देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक से आगे की कोरोना विषाणु के प्रभाव से संभावनाओं पर चर्चा हुई । देश आज उस मोड़ पर है जहां सरकारी आपाधापी के बीच मजदूरों और श्रमिकों का उनके घर सकुशल पहुंचाने का कार्य हो रहा है और संक्रमण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण जंग भी।
आज मुख्यमंत्रियों से हुई अहम बैठक में जहां राष्ट्र चिंताओं का पिटारा न्यूज़ चैनल से होते हुए आम जनता के बीच में पहुंचा वही अपनी अपनी व्यथा सुनाते हुए बहुत से राज्य के मुख्यमंत्री स्वप्रयासों से करोना विषाणु के संक्रमण को रोकने में नाकामयाबी दिखाते हुए स्पेशल पैकेज सहित राज्य की थम चुकी अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए आर्थिक केंद्रीय सहायता की मांग की, महाराष्ट्र में भयंकर आपदा का रूप ले चुका कोरोनावायरस से रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का कहना था लॉक डाउन बढ़ाने के अलावा कोई भी प्रयुक्त विकल्प महाराष्ट्र राज्य के अधिकारियों ने नहीं सुझाये । आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने रेल के माध्यम से मजदूरों और बाकी श्रमिकों के स्थानांतरण पर संक्रमण होने की गहरी चिंता व्यक्त की वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना था सभी राज्यों को प्रयासरत होकर अपने श्रमिकों के राज्य वापसी पर कार्य करना चाहिए, आज की इस मीटिंग से यही प्रतीत होता है की भारत वासियों को लॉक डाउन 4.0 के लिए कमर कसनी चाहिए। कोरोना वैक्सीन की बात करें तो पिछले कुछ दिनों में वैज्ञानिकों को वैक्सीन विकसित करने की अहम कामयाबी जरूर हाथ लगी है , इजरायल और इटली में ट्रायल शुरू होने को है ऐसे में उम्मीद और पुरानी दिनचर्या वापस स्थापित करने के कयास आम जनमानस में और भी प्रचुर हो जाते हैं। फिलहाल तो भविष्य की संभावनाओं पर विचार विमर्श करने से ही जोड़ी लोगों की दिनचर्या है।

लेखक और विचारक
आयुष मिश्रा

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