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High Court : बृजेश सिंह को नहीं मिली सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति, माननीयों की विशेष अदालत ने खारिज की एमएलसी की अर्जी


प्रयागराज। माननीयों की विशेष अदालत ने विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह को विधान परिषद के सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति देने के लिए प्रस्तुत अर्जी खारिज कर दी। विशेष न्यायाधीश आलोक कुमार श्रीवास्तव ने यह आदेश बृजेश सिंह की ओर से केंद्रीय कारागार अधीक्षक वाराणसी के जरिए प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर दिया।

अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके अंतर्गत बृजेश सिंह को विधान परिषद के सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए। गौरतलब है कि विधान परिषद सदस्य बृजेश सिंह ने केंद्रीय कारागार अधीक्षक वाराणसी के जरिए एक प्रार्थना पत्र न्यायालय को प्रेषित किया था, जिसमें यह कहा गया था कि विधान परिषद का सत्र शुरू होने जा रहा है। राज्यपाल की ओर से सत्र में शामिल होने के लिए एक निमंत्रण पत्र भेजा गया है। सत्र में हिस्सा लेना संविधान में उनका अधिकार है इसलिए न्यायालय उन्हें विधान परिषद सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान करे। क्योंकि वह गाजीपुर के मोहम्मदाबाद थाने में दर्ज हत्या के एक मुकदमे में न्यायालय के आदेश से न्यायिक अभिरक्षा में निरुद्ध हैं।

मुख्तार अंसारी से चल रही अदावत

प्रयागराज। मुख्तार और बृजेश सिंह में करीब तीन दशक से अदावत चल रही है। रेलवे और बिजली के ठेकों पर वर्चस्व को लेकर मुख़्तार अंसारी और बृजेश सिंह गैंग के बीच लंबी ऐतिहासिक दुश्मनी शुरू हुई जो आज तक जारी है। दोनों गिरोहों के बीच कई बार गैंगवार हुई। दोनों की अदावत में अब तक पूर्वांचल और अन्य जगहों पर दर्जनों लोगों की हत्या हो चुकी है।

 

 

2016 में वाराणसी से बने एमएलसी

 

प्रयागराज। राजनीति में बृजेश सिंह की दखल की ओर देखें तो वाराणसी-चंदौली में उनके परिवार का पुराना प्रभाव साफ नजर आता है। वाराणसी की एमएलसी सीट पर बृजेश और उनका परिवार पिछले 4 बार से जीतता रहा है। पहले दो बार बृजेश के बड़े भाई उदयनाथ सिंह, उसके बाद बृजेश की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह और उसके बाद मार्च 2016 में खुद बृजेश वाराणसी से एमएलसी बनकर राज्य की विधानसभा में दाखिल हुए।

 

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