महानिदेशक School शिक्षा से जवाब तलब, सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित अभ्यर्थी का मामला, बिना स्नातक डीएलएड करने पर रोका विद्यालय आवंटन
प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित अभ्यर्थी को बिना स्नातक पास किए डीएलएड की डिग्री लेने के आधार पर विद्यालय आवंटन रोकने पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा से जवाब तलब किया है। महानिदेशक की ओर से जारी किए गए सर्कुलर में निर्देश दिया गया है कि ऐसे शिक्षक जिन्होंने इंटरमीडिएट के बाद डीएलएड की डिग्री हासिल की है, लेकिन स्नातक बाद में किया है वे नियुक्ति के लिए अर्ह नहीं है। याचिका में इस आदेश को चुनौती दी गई है। पूजा तिवारी की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने सुनवाई की। याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची मध्य प्रदेश से एनसीटीई की ओर से मान्यता प्राप्त संस्थान से डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उसका चयन 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में हो गया। नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया गया। इस बीच महानिदेशक ने सर्कुलर जारी किया जिसके क्लाज 23 में 1981 की नियमावली की धारा 2( घ) का हवाला देकर कहा गया है कि इंटरमीडिएट के बाद बिना स्नातक पास किए सीधे प्रशिक्षण योग्यता प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी चयन के लिए अर्ह नहीं हैं। इस आधार पर याची का स्कूल आवंटन रोक दिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि एनसीटीई की ओर से 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना के तहत इंटर के बाद प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सहायक अध्यापक नियुक्त होने के लिए अर्ह हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी विक्रम सिंह व अन्य के केस में इसकी पुष्टि कर दी है। इस पर कोर्ट ने महानिदेशक से जवाब मांगा है। सुनवाई 16 मार्च को होगी।
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