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सैलाब के बीच बरसात ने बढ़ाई मुश्किल, डीपीएस के सामने चल रही नाव, गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग एक मीटर ऊपर पहुंचा, यमुना में भी बढ़त बरकरार

बाढ़ की विभिषिका अपना असर दिखाने लगी है। निचले इलाके के सैकड़ों घर बाढ़ में डूब गए हैं और लोग अपनी पूरी गृहस्थी छोड़ने के लिए मजबूर हैं। चेतावनी बिंदु के पार गंगा, यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग एक मीटर ऊपर पहुंचा। गंगा-यमुना ने कछारी इलाके की दो दर्जन से अधिक बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।


रिपोर्ट आलोक गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार

प्रयागराज। गंगा और यमुना के आए सैलाब से चौतरफा तबाही दिखने लगी है। दर्जनों शहरी मोहल्लों के साथ फाफामऊ कछार और झूंसी में गारापुर मार्ग पर पानी भरा हुआ है। आज बाढ़ का पानी रामजानकी मंदिर, बंधवा में प्रवेश कर गया। 

 डीपीएस और ओमेक्स सिटी भी बाढ़ के पानी से घिरी है। डीपीएस के बाहर इतना पानी लग गया है कि वहां नाव चलानी पड़ रही है। दोपहर 12 बजे से ली गई रीडिंग के मुताबिक गंगा का जलस्तर लाल निशान से लगभग एक मीटर ऊपर बह रहा है।

 बाढ़ के इस माहौल में जनपद में हो रही बरसात भी कहर ढा रही है। पिछले कई घंटों से जारी बरसात से ऊंचाई वाले इलाकों में रहने वाले लोगों की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। 


प्रयागराज:रामबाग डिवीजन के गऊघाट के यमुना बैंक रोड सबस्टेशन बाढ़ के चपेट में आया ।अधिकारियों के निर्देश पर सप्लाई को दूसरे सबस्टेशन से चालू किया जा रहा है।


फाफामऊ में गंगा का जलस्तर इस समय 85.67 मीटर (खतरे का निशान 84.73 मीटर) पर है। जबकि छतनाग में यही पानी 84.91 मीटर पर है। यमुना नदी का जलस्तर नैनी में 85.49 मीटर पर बह रहा है। यहां पर भी खतरे का निशान 84.73 मीटर पर है। दोनों नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोत्तरी जारी है। 12 बजे तक ली गई रीडिंग के मुताबिक पिछले दो घंटे में फाफामऊ में गंगा का जलस्तर चार सेंटीमीटर, छतनाग में चार सेंटीमीटर और नैनी में छह सेंटीमीटर बढ़ा है।


दोनों नदियों में आए उफान का असर जनपद के तराई इलाकों में देखने को मिल रहा है। नदियों का पानी कई-कई किलोमीटर दूर तक फैला गांवों तक नालों के जरिए पहुंच रहा है। मंगलवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल, बंधवा स्थित रामजानकी मंदिर, ओमेक्स सिटी के साथ ही यमुना बैंक रोड सबस्टेशन जलमग्न हो गया है। चौतरफा पानी भरे होने से सप्लाई काट दी गई है। इससे जुड़े एरिया को दूसरे उपकेंद्रों से सप्लाई की हिदायत दी गई है।


संगम का वह तट जहां श्रद्धालु स्नान करते थे

शहरी क्षेत्र की बात करें तो तटीय इलाके वाले सैकड़ों परिवारों ने बाढ़ राहत शिविरों  या फिर रिश्तेदारों के यहां शरण ले रखी है। जबकि बाढग़्रस्त कई मोहल्लों में तमाम परिवार अभी भी जमे हुए हैं। चोरी इत्यादि के डर से लोगों ने ऊपरी मंजिल पर या फिर छत पर डेरा जमा रखा है। इन परिवारों को खाने के पानी के साथ ही रोशनी की भी समस्या हो रही है। हालांकि प्रशासन के साथ कुछ समाजसेवी भी लोगों के बीच राहत सामग्री लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही है।

हजारों परिवार प्रभावित, एनडीआरएफ की सक्रियता बढ़ी



बाढ़ की वजह से केवल शहर के दो दर्जन से अधिक मोहल्लों के छह हजार से ज्यादा परिवार प्रभावित हैं। दस अगस्त तक दस हजार से ज्यादा लोग विभिन्न राहत केंद्रों में पहुंच चुके थे। बाढ़ राहत शिविरों में भी खाने-पीने के सामानों की किल्लत सामने आने लगी है। छोटा बघाड़ा में एक मंजिल तक का मकान पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। कमोवेश यही स्थिति राजापुर कछार, बेली, नेवादा कछार, दरियाबाद, मीरापुर, गऊघाट, अल्लापुर, दारागंज, संगम, रसूलाबाद, शंकरगढ़, मेंहदौरी, बद्री आवास योजना, शिवकुटी, चांदपुर सरोली, करेलाबाग, करेली, सदियाबाद की है। 


आईजी, जिलाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का नांव से भ्रमण कर स्थिति का लिया जायजा

बाढग़्रस्त एरिया में प्रशासनिक टीम के साथ ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीम लगातार गश्त कर रही है। लोगों को सचेत किया जा रहा है। स्टीमर पर एनडीआरएफ के जवान लाउडस्पीकर के जरिए अभी भी घरों में जमे लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जा रही है।

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